हास्य कविता भाग्य की रेखा | Hasya Kavita Bhagya Ki Rekha
आप पढ़ रहे हैं हास्य कविता भाग्य की रेखा ( Hasya Kavita Bhagya Ki Rekha ) :- हास्य कविता भाग्य की रेखा मेले में हुए प्रथम दर्शन टिक्की खाते उसको देखा। सहसा उर से आयी आवाज यही है मेरे भाग्य की रेखा।। आंखो में बसी मासूमी थी मुख पर थी…

