देश के जवान पर कविता :- निज देश प्रेम भाता है

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देश के जवान पर कविता

देश के जवान पर कविता

छोड़कर घर का सुख, जो सीमा पे जाता है।
दुश्मन की छातियों पे, तिरंगा गाड़ आता है।
नहीं है मोह जीवन का, न फिक्र कल की है।
रणबांकुरों को हमारे, निज देश प्रेम भाता है।

तानकर बंदूक दुश्मन के, पीछे दौड़ आता है।
दिखाकर शौर्य अपना, नदियाँ मोड़ आता है।
भारती की शान पर, कुदृष्टि जो कोई डाले,
तो यमराज बनकर उसे, पाताल छोड़ आता है।

हिमगिरि सा अडिग वो, सीमा पे रहता है।
ओले बर्फ बारिश को, दिन-रात सहता है।
भूलता निज गमों को जब कर्म पथ पर हो,
शान से जयकार, भारत माता की कहता है।

छोड़ आया था घर में, जो मेहंदी के हाथों को।
सपने रहे कुछ अधूरे जिन्हें बुनता वो रातों को।
सुहागन कर उसे, जो अपने घर छोड़ आया है,
वो मुहतोड़ देता जबाब, दुश्मन के घातों को।

छोड़कर घर में अपने, माँ की रोती आंखों को।
बिछुड़न का घाव देकर, नई दुल्हन के भावों को।
अकेले में सिसकता छोड़ आया जो पिता को,
मरहम लगाने वो आया, भारत माँ के घावों को।

देश का हर बच्चा हो सैनिक, मेरा अरमान है।
भारत माँ का हर सैनिक, ही देश की शान है।
हर कतरे पे लहू के,जिसके लिखा है हिंदुस्तान,
वो सैनिक ही मेरा सुख चैन, मेरा अभिमान है।

सैनिक कर्मठ जुझारू, और निष्ठावान होता है।
शौर्य की मिशाल, परम, साहस की खान होता है।
लाख जन्मों को लुटाकर भी न चुका पाए,
वो सैनिक का कर्ज जो अमर बलिदान होता है।

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profile-imageहिंदी प्याला ब्लॉग के समस्त सदस्यों को मेरा सादर नमन। मेरा नाम हरीश चमोली है ।मैं उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के एक छोटे से शहर चम्बा का रहने वाला एक कवि हृदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से हृदय में देशभक्ति के भाव और अपनी भाषा के लिए समर्पण का भाव लिए कुछ न कुछ लिखने का शौक रखता हूँ। बस इसी सकारात्मक सोच के साथ जीवन मे आगे बढ़ना चाहता हूँ और जीवन के किसी भी पड़ाव में कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

मेरा परिचय एवं उपलब्धियां निम्न हैं – नाम- हरीश चमोली पिता का नाम -श्री राजेंद्र प्रसाद चमोली माता का नाम – श्रीमती प्रेमा देवी चमोली जन्म तिथि – 21जनवरी1991 जन्म स्थान – ग्राम- डोबरा, पट्टी – सारज्यूला, जिला- टिहरी गढ़वाल ( उत्तराखंड ) स्थाई निवास – चम्बा, टिहरी गढ़वाल ,(उत्तराखंड) शिक्षा – डिप्लोमा इन हॉस्पिटैलिटी (देहरादून) व्यवसाय – फ़ूड न बेवरेज इंडस्ट्री प्रेरणा श्रोत- सुशील चमोली एवम दीक्षा बडोनी रूचि – कविता लेखन / समाज सेवा उपलब्धियां – स्वरचित कविताएँ अनेक डिजिटल पोर्टल पर प्रकाशित होती रहती हैं तथा “शब्दों की पतवार” नामक साझा काव्य संकलन प्रकाशित है।

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