हास्य कविता भाग्य की रेखा | Hasya Kavita Bhagya Ki Rekha

+2

आप पढ़ रहे हैं हास्य कविता भाग्य की रेखा ( Hasya Kavita Bhagya Ki Rekha ) :-

हास्य कविता भाग्य की रेखा

हास्य कविता भाग्य की रेखा

मेले में हुए प्रथम दर्शन
टिक्की खाते उसको देखा।
सहसा उर से आयी आवाज
यही है मेरे भाग्य की रेखा।।

आंखो में बसी मासूमी थी
मुख पर थी मोहक मुस्कान।
हरा भरा हुआ पुनःमन मेरा
जो सदियों से था रेगिस्तान।।

मित्रों ने मुझे छोड़कर बंदूक से
गुब्बारों पर लगाया निशान।
इधर मेरे चंचल से नैनो का
टिक्की पे केंद्रित हुआ ध्यान।।

समक्ष जाने का साहस न था
संग उसके चार सहेली थी।
दिल की बात कह दू या फिर
रहने दू यह विचित्र पहेली थी।।

तभी उसकी एक सहेली ने
कहा वह लड़का हमको घूर रहा।
परन्तु ज्ञात नहीं था मुझको
कि मै मुसीबत से कुछ दूर खड़ा।।

मुझे लगा बात बन जायेगी
ईश्वर की कृपा होगी आज।
लेकिन कुछ क्षणों में ही
खुलने वाला था अनोखा राज।।

अन्त में मुझे देख कर मुस्काई
कहने लगी वह तो इशारों में।
पैसे दे देना टिक्की वाले के
नहीं तो पहुंचा दूंगी सितारों में।।

भरी हुई प्यारी सी जेब मेरी
एक नज़र देखने से हुई खाली।
प्रतीत हुआ बिना पटाखों के
जैसे निकल गई मेरी दिवाली।।

अपने नैनो से बोला मैंने
अब नहीं करूंगा ऐसी मस्ती।
है बड़ा महंगा सौदा इसका
नहीं सोचना कि यह है सस्ती।।

पढ़िए :- हास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती


नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

हास्य कविता भाग्य की रेखा ” ( Hasya Kavita Bhagya Ki Rekha ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

+2
Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *