कोरोना पर कविता अजीब दौर | Corona Par Kavita Ajeeb Daur

1+

आप पढ़ रहे हैं सूरज कुरैचया द्वारा रचित ( Corona Par Kavita Ajeeb Daur ) कोरोना पर कविता अजीब दौर :-

कोरोना पर कविता अजीब दौर

हिंदी कविता कोरोना पर

समस्त चौराहे हुए हैं वीरान
आया कैसा यह अजीब दौर।
अदृश्य शत्रु ने भूख, मृत्यु का
अंधेरा फैलाया है चारों ओर।।

बच्चो का कोलाहल हुआ शांत
गुम हो गई उनकी मुस्कान।
हरी भरी जीवन की हरियाली
कुछ दिन में बनी रेगिस्तान।।

कोरोना नाम ने मानव की
खुशियों में लगा दी है आग।
जैसे जीवनरूपी नौका में
किसी ने कर दिया है सुराग।।

मजदूर सभी हुए परेशान
जा नहीं सकते हैं अपने गांव।
यातायात सब बंद हुए हैं
पा नहीं सकते पीपल की छांव।।

सब बैठे हैं घर में छुपकर
बाहर निकलना है अपराध।
मानव को इस महामारी ने
दिया है दुख प्रबल अगाध।।

ईश्वर से सभी करो कामना
दुखद क्षण हो जाए व्यतीत।
पुनः मधुर पवन बहकर सुनाए
स्वच्छ जीवन का प्रेम गीत।।

पढ़िए :- कोरोना वायरस पर कविता “चलो आज घर में वक्त बिताते हैं”


नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

“ कोरोना पर कविता अजीब दौर ” ( Corona Par Kavita Ajeeb Daur ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

1+

Leave a Reply