मानव जीवन पर कविता :- मानव तुझको बड़े नसीब से | Manav Jivan Par Kavita

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मानव जीवन पर कविता

मानव जीवन पर कविता

एक दिन जब एकांत में
देखा स्वयं को करीब से ।
आईना बोला जीवन मिला
मानव तुझको बड़े नसीब से ।।

तू माटी का वह पुतला है
जो चट्टानों को देता हिला ।
मोड़कर सरिता की धार को
रेगिस्तान में पुष्प देता खिला ।।

मांगता नहीं किसी से भीख
खुद निर्मित करता अपनी तकदीर
कठिन परिश्रम करके मार्ग में
मुश्किलों की तोड़ देता जंजीर।।

सुखमय क्षणों को त्यागकर
मुसाफिर बनकर चलता अकेला।
असंभव को तू संभव करके
खिला देता हैं पतछड़ में बेला।।

खेलता हर दिन तूफानों में
भरकर हृदय में उत्साह।
लोगों के नकारात्मक शब्दों की
नहीं कभी करता परवाह।।

नभ में भरता सपनो की उड़ान
मानव बनकर कभी कलाम।
शक्तिशाली शेरो को पिंजरे में
बंद करके बनाता अपना गुलाम।।

आंक स्वयं को सदैव श्रेष्ठ
वस्त्र धारण न कर गरीब से।
वसुधा पर जीवन मिला
मानव तुझको बड़े नसीब से।।

पढ़िए :- चरित्र निर्माण पर कविता “मूल्यांकन”


नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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