प्रेरक लघु कविता :- तोड़ जंजीरें | Prerak Laghu Kavita

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प्रेरक लघु कविता

प्रेरक लघु कविता

पुराने विश्वासों की तोड़ जंजीरें
सकारातमक शब्द धारण करके,
जाग्रत करो नये सपनों के चित्र
प्रबल एहसास अवचेतन में भरके।

प्रकृति का यह अदभुद रहस्य
हरा भरा कर देता रेगिस्तान को,
मानव की सच्ची कल्पनाओं से
हासिल करता नभ की उड़ान को।

बरसने लगते बादल घनघोर
थम जाता कहीं तेज तूफान,
विचारों की ताकत होती प्रकट
सोच के घोड़े दौड़ता जब इंसान।

योग्य व्यक्ति जब होता निराश
पुकारता वह हृदय से हार को,
जाने अंजाने में स्वयं छीनता
वह विजेता के पुरस्कार को।

हर पल जो रहता उदास
करता वह सदा मित्रों की तलाश,
मुस्कान में जो करता विश्वास
लोग उससे जुड़ने का करते प्रयास।

आकर्षण का अनमोल नियम
सबके लिए हैं एक समान,
जैसा जो करता उपयोग
मिलता उसको उतना सम्मान।

नजरिए का है सारा खेल
जिन शब्दों को जो दोहराता है,
अमीरी, गरीबी के मोतियों को
स्वयं जीवन धागे में पिरोता है।

पढ़िए :- सकारात्मक सोच पर कविता “सोच ऐसी राखिए”


नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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