हिंदी कविता पागल | Hindi Kavita Pagal
हरीश चमोली जी द्वारा रचित हिंदी कविता पागल ( Hindi Kavita Pagal ) :- हिंदी कविता पागल मेरे सपनों को तुम,इस तरह तोड़ो मत।अपना रुख तुम कहीं,और मोड़ो मत।कि मर जायेंगे हम,अब तुम्हारे बिनामेरा साथ तुम यूँ,इस तरह छोड़ो मत। क्यूँ पागल बनाया,था तुमने मुझेगर जाना ही था तो,क्यूँ लगाई…

