हरदीप बौद्ध जी की ” हिंदी कविता आलोचक ” :-

हिंदी कविता आलोचक

सुनो! आलोचकों
मेरी ख़ामोशी ही
अनगिनत सवालों का
जवाब है।

तुम करते रहो प्रतिकार
मुझे अच्छा लगता है,
आपका खीझना व्यवहार।

क्योंकि यही तो है
मेरे लक्ष्य की पतवार।

इसी से मैं अपनी रगों में
साहस भरता हूँ,
पर! मैं मौन रहूँ तो भी
आपको क्यूँ अखरता हूँ?

चेत है! कदम मेरे बढ़ने पर
जलन आपकी बढ़ेगी,
आलोचना करो या प्रशंसा
मेरी प्रवृति नहीं बदलेगी।

पढ़िए :- हिंदी कविता “तुम साहित्यकार “


रचनाकार का परिचय

हरदीप बौद्ध

यह कविता हमें भेजी है हरदीप बौद्ध जी ने गाँव अखत्यारपुर जिला बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) से।

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