हिंदी कविता अभिलाषा | Hindi Kavita Abhilashsa

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हिंदी कविता अभिलाषा

हिंदी कविता अभिलाषा 

तू मेरे तन की तनया है।
तेरे रोम-रोम मे खुशबू है मेरी।

तू तनय से भी तेज तर्रार है।
पर समाज मे तेरे मान की रार है।

अब तू बदल,बदला है समय।
समय के साथ तू भी हो निर्भय।

तुझे हर प्रण, प्रतिज्ञा को
जिद और हठ से पूरी करनी है।

मत गिरने देना, आत्मविश्वास को।
कदम-कदम पर मेरा साथ रहेगा तेरे विश्वास को।

तुझे हर भूमिका में,बेटी,बहु व माता की।
हटाना है सामाजिक बेड़ियों की बाधा को।

आ पकड़ ले,हाथ रब का कसकर।
कितने ही झंझावात आऐ,तेरे सामने भंयकर।

पर हमेशा डटी रहना,बांधे सिर पर सेरा
सबका जर्रा जर्रा कह उठे,वाह वाह तेरा सेरा।

घर, सुसराल सब में तनया तेरा ही हो बासा
ऐसी मेरी तन मन की अभिलाषा।


रचनाकार का परिचय
हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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