हिंदी कविता अल्हड़ जवानी

हिंदी कविता जीवन रहस्य

जीवन की भी है,अलग ही व्यथा।
बचपन, जवानी, वृद्धा अवस्था।

निकला बचपन खेलने कूदने में।
नित नए रोज सपने बुनने में।

फिर हुए किशोर,आ गई अल्हड़ जवानी।
जोश खरोश से, बात- बात में करते नादानी।

जवानी का नशा,ऐसा मतवाला।
नहीं कोई मेरा जैसा, दिलवाला।

नहीं समझा किसी को अपना।
मैं और मेरा जीवन ही सपना।

जवानी के झाग उतरने मे देर न लगी।
पता ही नही चला,कब आई और गई।

अब जिम्मेदारियों ने आकर घेरा।
निकल गया समय अब किया हेरा।

अब पछताएं रात और दिन।
रहने लगा हर समय गमगीन।

जिंदगी का पाठ पढ़ा गई, अल्हड़ जवानी।
जोश मे कभी मत खोवो होश, बता गई जवानी।

समय बड़ा बलवान है।
जीवन है अनमोल।

हंसराज “हंस”कहता छोड़, अब अल्हड़ जवानी का नशा।
अभी भी समय है,मेहनत से कमा पैसा।

पढ़िए :- समय पर कविता “समय आएगा”


रचनाकार का परिचय
हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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