हंसराज "हंस"

Samay Par Kavita | समय पर कविता

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समय पर कविता
Samay Par Kavita

Samay Par Kavita

समय समय का फेर है, समय बड़ा बलवान।
काबा लूटी गोपियां, वही अर्जुन वही बाण।

समय की कीमत जान, होता है बड़ा मूल्यवान।
चिड़िया चुग गई खेत, फिर पछताए किसान।

समय ना किसी का हुआ, ना ही किसी का होगा।
समय के साथ जो चलेगा, वही निरंतर आगे बढ़ेगा।

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब‌।

सभी के पास है, 24 घंटे का दिन रात।
समय का महत्व जाना जिसने, कभी नही खाई मात।

पल्ले बांध लो यह गांठ, समय का करेंगे पूरा नियोजन।
करके कड़ी मेहनत, जीवन का करेंगे संयोजन

जीवन में आए अवसरों को, कभी ना छोड़ना।
निकल गया समय तो, फिर हाथ मलते रहना।

जितने भी लोग, बने है महान।
उन्होंने हमेशा किया है, समय का सम्मान।

इसलिए कभी मत कहो, बुरा है मेरा समय।
आपने समय को नहीं पहचाना, इसलिए बुरा हुआ है समय।

जिसने भी समय की, नही की कद्र।
उसको समय ने भी, कर दिया बेकद्र।

इसलिए अब भी समय है, मत करो इसको बेकार।
हर पल-पल को लेओ काम, तो आपकी होने लगेगी खूब जयकार।

इसलिए हंसराज हंस कहता है,समय रहे हमेशा नियंत्रण में।
जब ही होगी,हर उपलब्धि आपके चरण में।

पढ़िए :- बदलते समय पर कविता “समय का पहिया घूम रहा है”


“रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति ( रिसोर्स पर्सन ) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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