मनोबल पर कविता | Manobal Par Kavita

जलेश्वरी गेंदले जी द्वारा रचित ” मनोबल पर कविता ” :-

मनोबल पर कविता

मन तो मेरा आसमान में उड़ने का है
सोच नहीं है मेरी अब पीछे मुड़ने की
मन चाहा मुकाम पाने के अरमान हैं
यही तो स्वयं का मनोबल है।

पास आऊँ वो सारी बात सुनाऊँ
जिनसे मिली हैं खुशियां सारी
जहाँ हम सब हैं एक समान,
सम्मान, स्वतंत्रता के अधिकारी
यही तो स्वयं का मनोबल है।

चली थी अकेली मैं बड़े गर्व से
सोचा था कि साथ आएंगे सभी
रुक गए कुछ लोग पीछे ही
मैं समय के साथ चलती रही
यही तो स्वयं का तो मनोबल है।

पक्का है दिल में मन का विश्वास
रोके चाहे कोई भी मेरी राह
चल पड़ी हूँ लेकर कलम हाथ
लिखूंगी मैं बीता कल औऱ आज़
सच में यही तो मेरा मनोबल है।

बिखरे हैं अब एक हो जाएं
अभिमान बिना जिस्म बेजान है
जाना मैंने कोई नहीं तो क्या हुआ
अब सकारात्मक विचार क्रांति है
आभार आपसे कलम रूपी हथियार मिला
क्योंकि! यही तो मेरा मनोबल है।

पढ़िए :- प्रेरणादायक कविता “अंकुर से बढ़ते जीवन में “


रचनाकार का परिचय

जलेश्वरी गेंदले

यह कविता हमें भेजी है जलेश्वरी गेंदले जी ने पथरिया, मुंगेली (छत्तीसगढ़) से।

“ मनोबल पर कविता ” ( Manobal Par Kavita ) आपको कैसी लगी? “ मनोबल पर कविता ” ( Manobal Par Kavita ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published.