जन्माष्टमी महोत्सव पर कविता | Janmashtami Mahotsav Par Kavita
आप पढ़ रहे हैं जन्माष्टमी महोत्सव पर कविता :- जन्माष्टमी महोत्सव पर कविता गोपियों के संग रास रचैयातुम हो मेरे किशन कन्हैया।तेरे आराधक तेरे बुला रहे हैंचले आओ मेरे साॅंवरिया।। मीरा के प्रभु गिरधर नागर।राधा के तुम हो मुरलीधर।। मेरे लिए तो तुम श्रीराम हो।और तुम ही मेरे घनश्याम हो।। प्यासे इन नयनों कोप्यास बुझाने आओ।मन हो जाए…

