Badal Par Kavita | Best Poem On Clouds In Hindi | बादल पर कविता

Badal Par Kavita आप पढ़ रहे हैं बादल पर कविता :-

Badal Par Kavita
बादल पर कविता

Badal Par Kavita

खींच खींच ले मन को जाते
मीत मनोहर वे बन जाते ,
उमड़- घुमड़ कर आगे पीछे
उड़ते बादल कहां को जाते?

कुछ नाचते खुशी मनाते
कुछ के आंसू झर झर जाते ,
सुख दु:ख का यह संगम कैसा ?
नई नवेली दुल्हन जैसा ,
आंखों से जो जल बरसाते
उड़ते बादल कहां को जाते?

उनके सुख-दु:ख से क्या हम को?
उनके दु:ख से ही सुख हमको ,
अपनापन तो दूर खड़ी है
आशा केवल यही लगी है,
जल जीवन हमको दे जाते
उड़ते बादल कहां को जाते?

खुद सुखी संसार सुखी है
गैर के दु:ख से कौन दुखी है ?
मानव का स्वभाव निराला
बादल में भी गोरा काला,
लौट कर वापस क्यों नहीं ?
उड़ते बादल कहां को जाते ?

पढ़िए :- वसंत ऋतु पर कविता – मेरे प्रिय बसन्त | Poem On Basant Ritu


रचनाकार का परिचय

रामबृक्ष कुमार

यह कविता हमें भेजी है रामबृक्ष कुमार जी ने अम्बेडकर नगर से।

“ बादल पर कविता ” ( Badal Par Kavita ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published.