Rose Poem In Hindi | गुलाब पर कविता | Gulab Par Kavita

Rose Poem In Hindi आप पढ़ रहे हैं गुलाब पर कविता :-

Rose Poem In Hindi
गुलाब पर कविता

Rose Poem In Hindi

मैं गुलाब हूं फूलों में,
रहता कृष्ण के झूलों में,
या वीर जवानों के पथ पर
या सुंदर बालों के जूड़ो में,

मेरा जन्म हुआ है कांटों में,
जीवन के विघ्न सा बाटो में,
वो चुभ जाए जो हिलूं जरा,
हूं  जिह्वा जैसा दांतों में

पंखुड़ियां रंग भरे कोमल,
ले भरी जवानी गातो में,
कोई विघ्न भला क्या कर सकता?
जब खिलूं हरे भरे पातों में।  

मैं गुलाब ,कई रंगों में,
मन मीत मनोहर अंगों में,
मैं बिखेर खुशबू अपना,
जीवन जीता सानन्दो में।

फूलों में नाम मेरा पहला,
मैं प्रेम निशानी अलबेला,
वो प्यार में प्यारा बन जाता
कांटों में जीवन जीने वाला। 

मेरा रूप गुलाबी गालों पर,
निखरे जस झूमती डालो पर,
तारीफ़ सदा होता मेरा,
मद मस्त जवानी हालो पर

है प्रेम रंग से बड़ा कौन?
खिलते चेहरे को पढ़ा कौन?
मैं गुलाब तन मन का हूं,
ख़ुश रहो सदा न रहो मौन।

पढ़िए :- Phool Ki Abhilasha Kavita | फूल की अभिलाषा कविता


रचनाकार का परिचय

रामबृक्ष कुमार

यह कविता हमें भेजी है रामबृक्ष कुमार जी ने अम्बेडकर नगर से।

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