ट्रेन जैसी हो गई है ज़िंदगी | Train Jaisi Ho Gayi Zindagi

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता ट्रेन जैसी हो गई है ज़िंदगी :- ट्रेन जैसी हो गई है ज़िंदगी सच ही कहा है ज़िंदगी ट्रेन की तरह है हर सुबह चल पड़ती भाग दौड़ की दौड़ में कुछ सपनो को लिए कुछ अपनो को लिए तो कुछ चाहतों में जीने…

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भारत देश पर हिंदी कविता | Bharat Desh Par Kavita In Hindi

भारत की महिमा का गान करती हुयी हंसराज "हंस" जी की ( Bharat Desh Par Kavita In Hindi ) भारत देश पर हिंदी कविता :- भारत देश पर हिंदी कविता जहां पूजी जाती है नारी। जहां बहती है सरिता प्यारी। जिसके उत्तर मे है कन्याकुमारी। दुनिया में जिसकी शोभा न्यारी।…

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हिंदी कविता आख़िर क्यों होता है | Hindi Kavita Akhir Kyon

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता आख़िर क्यों होता है ऐसा : हिंदी कविता आख़िर क्यों होता है आख़िर क्यों होता है ऐसा.. जब भी जन्म हुआ लड़की का क्यों उसको देखा जाता है ऐसा जैसे मानो उसने कोई पाप कर दिया हो क्यों कहा जाता है बचपन से कि…

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कविता आसमां के सफ़र में | Kavita Aasmaan Ke Safar Me

आप पढ़ रहे हैं ( Kavita Aasmaan Ke Safar Me ) कविता आसमां के सफ़र में :- कविता आसमां के सफ़र में आसमां के सफ़र में होता हैं क्या ? हल्के फुल्के आते जाते रुई से फाहों सी बादलों के नन्हें मुन्ने श्वेत भूरे झुंड औऱ आसमान के झूठे नीले…

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सैनिक दिवस पर विशेष कविता | Sainik Divas Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं ( Sainik Divas Par Vishes Kavita ) सैनिक दिवस पर विशेष कविता :- सैनिक दिवस पर विशेष कविता सीमाओं पर डटें, जो देश की रखवाली करते हैं बिना स्वार्थ हित लाभ के जो पहरेदारी करते हैं सर्दी शीत धूप ताप से लड़ते जो प्रतिक्षण हैं उनकें…

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मकर संक्रांति पर कविता :- मकर संक्रांति आई है | Makar Sankranti Par Kavita

आप पढ़ रहे है मकर संक्रांति पर कविता :- मकर संक्रांति पर कविता मकर संक्रांति आई है एक नई क्रांति लाई है निकलेंगे घरों से हम तोड़ बंधनों को सब जकड़ें है जिसमें सर्दी से बर्फ़ शीत की गर्दी से हटा तन से रजाई है मकर संक्रांति आई है एक…

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कविता कितना आसान होता है | Kavita Kitna Asaan Hota Hai

आप पढ़ रहे हैं कविता कितना आसान होता है :- कविता कितना आसान होता है कितना आसान होता है ये कहना कि तुम समझ नहीं सकते, कितना आसान होता है ये मानना कि तुम समझ नही सकते। कितना आसान होता है ये सोचना कि तुम समझ नहीं सकते, कभी सोचा…

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भारत के रीति रिवाज कविता ( बारह मासा ) भाग – 2

" भारत के रीति रिवाज कविता भाग--1" में मास-- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ और श्रावण के महीनों में चलने वाले त्यवहारों और गतिविधियों का वर्णन है । अब शेष महीनों का चित्रण प्रस्तुत भाग में किया जा रहा है। भारत के रीति रिवाज कविता मास-- भादौं काली घटा घनघोर घटा,…

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भारत देश के रीति रिवाज ( बारहमासा ) | Bharat Ke Riti Riwaj

हमारे देश भारत वर्ष में पूरे वर्ष बारहों महीने अलग अलग तरीकों से पृथक् पृथक् त्योहार मनाने और गतिविधियां करने की परम्परा है , जो कि सम्पूर्ण विश्व में अद्भुत हैं । प्रस्तुत रचना " भारत देश के रीति रिवाज ( बारहमासा ) " में प्रत्येक महीने की परम्पराओं का…

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भ्रष्टाचार पर कविता :- देश के सारे भ्रष्टाचारी

आप पढ़ रहे हैं भ्रष्टाचार पर कविता :- भ्रष्टाचार पर कविता इस देश के लिए हम मर मिटेंगे, देश के सारे भ्रष्टाचारी अब पिटेंगे। फर्जीवाड़ा करके बना दिया श्मशान, चली गई उसमें कितने लोगों की जान। जिधर देखूं उधर सब भ्रष्टाचारी नजर आते, यह कभी नहीं सुधरेंगे देश के गद्दार…

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हिंदी कविता मुन्ने की पोथी | Hindi Kavita Munne Ki Pothi

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता मुन्ने की पोथी :- हिंदी कविता मुन्ने की पोथी मेरी पोथी हो सबसे न्यारी। न ज्यादा मोटी न भारी। मुझे लगती है बड़ी प्यारी। उसमें खूब सारे हो चित्र। मैं खूब करू उनसे बातें। मेरा हो पन्ना उसमें एक। मैं काम करूं सारी रातें। उसमें…

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विश्व हिंदी दिवस पर छोटी कविता | Vishva Hindi Diwas Kavita

आप पढ़ रहे हैं विश्व हिंदी दिवस पर छोटी कविता :- विश्व हिंदी दिवस पर छोटी कविता हिन्दी भाषा हो हर मन की । भाषा बन जाये यह जन जन की ।। हिन्दी भाषा अपनी भाषा, सब में यह अभिमान हो । समृद्ध बने हिन्दी भाषा, कहीं नहीं अपमान हो…

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