ट्रेन जैसी हो गई है ज़िंदगी | Train Jaisi Ho Gayi Zindagi
आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता ट्रेन जैसी हो गई है ज़िंदगी :- ट्रेन जैसी हो गई है ज़िंदगी सच ही कहा है ज़िंदगी ट्रेन की तरह है हर सुबह चल पड़ती भाग दौड़ की दौड़ में कुछ सपनो को लिए कुछ अपनो को लिए तो कुछ चाहतों में जीने…

