हिंदी कविता मुन्ने की पोथी | Hindi Kavita Munne Ki Pothi

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हिंदी कविता मुन्ने की पोथी

हिन्द कविता मुन्ने की पोथी

मेरी पोथी हो सबसे न्यारी।
न ज्यादा मोटी न भारी।
मुझे लगती है बड़ी प्यारी।

उसमें खूब सारे हो चित्र।
मैं खूब करू उनसे बातें।
मेरा हो पन्ना उसमें एक।
मैं काम करूं सारी रातें।

उसमें कई सारे हो खेल।
पहेलियों का भी हो मेल।
मोटे मोटे हो आखर।
उंगली फेरू मैं चाहकर।

कहानी, कविता भी हो।
छोटे छोटे हो बाल गीत।
गाते गाते बने सब मीत।

ऐसी पुस्तक बनाओ मेरी।
पापा में पढ़ूंगा हर रोज।
पढ़ाई नहीं लगेगी बोझ।
फिर खूब होगी मेरे मौज।

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“रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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