हिंदी कविता मेरा बचपन | Hindi Kavita Mera Bachpan

बचपन के दिन ऐसे दिन होते हैं जिसके लौट आने की तमन्ना तो सभी करते हैं लेकिन वो दिन लौट कर कहाँ आते हैं। आइये पढ़ते हैं ऐसी ही बचपन को याद करवाती हिंदी कविता मेरा बचपन :-

हिंदी कविता मेरा बचपन

हिंदी कविता मेरा बचपन

कितना प्यारा था मेरा बचपन?
ना कोई गिला, न कोई शिकवा।
सब लगते थे अपने प्रियजन।

सबसे सुनहरा पल है जीवन में बचपन।
ना कोई चिंता, ना कोई होड़।

दोस्तों के संग खूब समय बिताते।
केवल खेल खिलौने ही भाते।

क्या मजे थे गुल्ली डंडे में?
सुबह से शाम तक खेलते।
टोली के संग में।

कंचों से खेलना, साइकिल की कैची बनाना।
आज भी याद आ ही जाता है।
निशाना लगाकर ठहाका लगाना।

ना कोई अपना था, ना कोई पराया था।
ऊंच नीच, छुआछूत का ज्ञान नही था।

ना कोई जिम्मेदारी, ना कोई मोहमाया।
बस मस्ती के दिन थे, बेफिक्री का साया।

बचपन के खेल खूब याद आते।
कितना प्यारा था मेरा बचपन?
चलो ढूंढ कर लाते है मेरा बचपन।
फिर से अपना प्यारा बचपन।


रचनाकार का परिचय
हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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