Ghar Par Kavita | घर पर कविता – अपना घर, घर होता है

घर का महत्त्व बताती ( Ghar Par Kavita ) घर पर कविता ” अपना घर, घर होता है “

Ghar Par Kavita
घर पर कविता

Ghar Par Kavita

पापा के द्वारा,बनाया
अपना घर ।
अपना घर, घर होता है।
जैसा भी हो, पर प्यारा होता है।

कभी भी करो आना जाना।
नहीं बुनना पड़ता कोई ताना-बाना।
अपना घर होता सबसे प्यारा।
खुशी प्रेम की बहती है रसधारा।

नींद भी आ ही जाती है।
चाहे बिस्तर कैसा भी होता।
घर के मालिक भी हम, नौकर भी हम।
जिसका होता है अपना घर,
उसे भला क्या डर होता।

घर हमें सुरक्षा का एहसास कराता।
जब घर का कोई सदस्य पास होता।

अपने घर में कैसे भी रहो मस्त।
कैसे भी दिन देखे पर कभी नहीं हुए पस्त।

सबका हो अपना एक घर।
जिसका सबके लिए खुला रहे हमेशा दर।

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रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"

हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति ( रिसोर्स पर्सन ) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते।

मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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