सफलता के लिए प्रेरित करती कविता :- प्रखर धूप में भी चलता चल

सफलता के लिए प्रेरित करती कविता पथिक है अगर तू पथ का प्रखर धूप में भी चलता चल। विहग है अगर तू नभ का ज्ञानी-पंख लगाकर उड़ता चल।। भीड़ का हिस्सा न बनकर सफल ढाचे में ढलता चल। अतीत का किस्सा न बनकर वर्तमान में परिश्रम करता चल।। अगर मार्ग…

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प्रेरणादायक कविता भय का मुखौटा उतार | Prernadayak Kavita Bhay Ka Mukhauta Utaar

आप पढ़ रहे हैं प्रेरणादायक कविता भय का मुखौटा उतार :- प्रेरणादायक कविता भय का मुखौटा उतार भय का मुखौटा उतार कर धारण करो साहस की ज्वाला। किताबें पढ़कर बनो तुम ज्ञानी मिटाओ तम सा अज्ञान काला।। वास्तविकता में रहना सीखो किसी व्यक्ति की ना करो नकल। तुम जैसा नहीं…

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यशु जान द्वारा अभिनेता ऋषि कपूर जी को श्रद्धांजलि स्वरुप रचना

अभिनेता ऋषि कपूर जी को श्रद्धांजलि :- आज हमारे बीच एक संत पुरुष नहीं रहे जिनको हम श्री ऋषि कपूर जी के नाम से जानते थे , पहचानते थे। और आज भी हमें यक़ीन नहीं हो रहा कि एक ऐसा ज़िंदा दिल , आला दर्ज़े का फ़नकार एक अच्छा पिता,…

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प्रेरणादायक बाल कविता नजरिया | Prernadayak Bal Kavita

आप पढ़ रहे हैं प्रेरणादायक बाल कविता नजरिया :- प्रेरणादायक बाल कविता नजरिया घोर तम छाया वसुधा पर जब भानू हुआ अदृश्य । कुछ क्षण में ही प्रकृति के लुप्त हुए सुनहरे दृश्य ।। पक्षियों को प्रतीत हुआ कि बहने वाली है तम की धारा । भानू ने है प्रकाश…

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बाल कविता नील गगन में | Bal Kavita Neel Gagan Me

बाल कविता नील गगन में भानू ने सुबह नील गगन में फैलाई अपनी जीवन लाली, प्रकृति ने पुनः पहने परिधान मुस्काई पौधों की कली निराली। प्रसून सभी पल भर में खिले जब व्यतीत हुई यामिनी काली, वृक्षों ने मृदुल वात बहाकर जिम्मेदारी पूरी जीवन की संभाली। मन मुग्ध होकर पत्ते…

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हिंदी कविता कुछ कह रहा हूँ | Hindi Kavita Kah Raha Hu

हिंदी कविता कुछ कह रहा हूँ कुछ कह रहा हूँ, दिलरूबा! तू बातें सुन मेरी महबूबा!! सारे अरमान दफन हो गए हैं! सारे संबंध दफन हो गए हैं!! तुमसे संबंध सारे टूट गए! क्यों तुम मुझसे रूठ गए!! दिल के पिंजरे में जैसे तू परिन्दा है! अभी मुझमें तू जिन्दा…

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हिंदी कविता क्या लिखूं क्या छोड़ दूँ | Hindi Kavita Kya Likhu

  हिंदी कविता क्या लिखूं क्या छोड़ दूँ शूल सा चुभता हर पल नित् कैसे वो वेदना तोड़ दू, ख्वाहिश हुई इसे लिखने की,पर क्या लिखूं क्या छोड़ दूं। कुछ वर्ष बीते है संगम धरा पर जो लग रहा है युगों समान, अन्न ग्रासन भी इस देवधरा का लग रहा…

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देश के जवान पर कविता :- निज देश प्रेम भाता है

आप पढ़ रहे हैं ( Desh Ke Jawan Par Kavita ) देश के जवान पर कविता " निज देश प्रेम भाता है " :- देश के जवान पर कविता छोड़कर घर का सुख, जो सीमा पे जाता है। दुश्मन की छातियों पे, तिरंगा गाड़ आता है। नहीं है मोह जीवन…

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तुम याद बहुत आती हो कविता | Yaad Bahut Aati Ho Kavita

तुम याद बहुत आती हो कविता हम क्या सोचते है और क्या होता है ना जाने ये दिल क्यों रोता है, नजरों से तुम सब कुछ कह जाती हो , तुम याद बहुत आती हो। तेरे बिन हर पल बुरा लगता है, तेरा चेहरा सामने हो तो मन पराग सा…

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हिंदी कविता काफिला | Hindi Kavita Kafila

हिंदी कविता काफिला चलो थोड़ा दूर चलें फासले तय करें इस सड़क को नाप लें, लंबा सा दिखता यह रास्ता साथ में बिताते चलें, कुछ तुम अपनी कहो कुछ हम अपनी बताते चलें। कहीं थक हार के बैठ जाओ तो पीछे नहीं बस आगे ही देखना, अपने सपने को दोबारा…

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हिंदी कविता यूँ राहों में | Hindi Kavita Yun Rahon Me

हिंदी कविता यूँ राहों में तेरी जुल्फों की घनेरी छाँवों में रात भर रहा तेरी बाहों में, निकल के चाँद छिप गया चेहरा नजर आया यूँ राहों में। फितरत तेरी कुछ इस तरह की अदाओं से राज करती है, तेरे जगने से दिन निकलता है झुके पलकें तो रात ढ़लती…

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रामधारी सिंह दिनकर पर कविता :- दिनकर की चमक

रामधारी सिंह दिनकर पर कविता पश्चिम में छिपता दिनेश जो,उदित होता फिर नित्य नभ में। है चकित क्षितिज भी देख,दिनकर की चमक सतत जग में। प्रखर अग्नि सा तेज भरा, वीररस के ओजस्वी राष्ट्रकवि। भानु रश्मि सम तीव्र वेग सी, थी उनकी लेखनी की गति। रेणुका,कुरुक्षेत्र,उर्वशी एवं, सूरज का ब्याह…

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