ज्ञान पर कविता – ज्ञान अनमोल खजाना है | Gyan Par Kavita

ज्ञान पर कविता ज्ञान पर कविता ज्ञान अनमोल खजाना है बांट सका है कौन इसे ?न भाई बंधु जमाना है,अनमोल रतन है हर रत्नों में पर इसको नहीं छुपाना है। ज्ञान की ज्योति जले घर-घर मेंज्योति से ज्योति जलाना है,घर-घर महके ज्ञान की खुशबू ज्ञान का अलख जगाना है। ज्ञान बिना मानव जीवन…

Continue Readingज्ञान पर कविता – ज्ञान अनमोल खजाना है | Gyan Par Kavita

सुख दुख कविता – एक दिन सुख दुःख | Sukh Dukh Kavita

सुख दुख कविता सुख दुख कविता भेंट हुआ एक दिन सुख दुःख कादुःख ने खबर लिया तब सुख का,दुःख बोली ओ! प्यारी बहनाकितना मुश्किल तुमसे मिलना रहती कहां?नहीं हो दिखतीहर कोई चाहे तुमसे मिलना,सुख ने दुःख को,गले लगा करभर मन में मुस्कान,मनोहर, दीदी!तुम तो, बड़ी सयानीअपनी बीती,कहो कहानी,दुःख ने सुख…

Continue Readingसुख दुख कविता – एक दिन सुख दुःख | Sukh Dukh Kavita

हिंदी पर कविता – शब्दों की हिंदी भाषा | Hindi Par Kavita

हिंदी पर कविता हिंदी पर कविता स्वर ध्वनि शब्दों की हिंदी भाषाअमृत धारा सी बह रही हैरगो में शीतल सरिता सी चलकरसांसों के सागर में बह रही है।   अनमोल कितना मधुरमयी है दुनिया भी तुमको पहचानती हैतेरी प्रसंशा का राग की धुनसुबह सवेरे खूब बज रही है।  अरमान अभिमान सम्मान वैभवगौरव…

Continue Readingहिंदी पर कविता – शब्दों की हिंदी भाषा | Hindi Par Kavita

लालसा पर कविता – लालसा न चाह की है | Lalsa Par Kavita

लालसा पर कविता लालसा पर कविता लालसा न चाह की है,जीवन में कुछ पाने को लालसा न बड़ा बनू,न बहुत कुछ कर जाने को छीन कर खुशियां किसी की,रोटियां दो वक्त की  मैं चलूं तारों को लाने,छोड़ इन्हें मर जाने को धिक्कार है जीवन को ऐसे,धिक्कारता हूं लोग को जो…

Continue Readingलालसा पर कविता – लालसा न चाह की है | Lalsa Par Kavita

गाँव की याद पर कविता | Gaanv Ki Yaad Par Kavita

गाँव की याद पर कविता गाँव की याद पर कविता यूँ ही बैठे-बैठे ख्याल आ गया,कि मन में हमारा गाँव आ गया।वो बचपन की मस्ती भरे रात-दिन,ये देखो मैं महुआ की छांव आ गया।। वो खेतों में जाना, वहां काम करना,मिले जब भी मौका तो भैसें चराना,कबड्डी, पकिल्लो, गुड़ी डण्डा,…

Continue Readingगाँव की याद पर कविता | Gaanv Ki Yaad Par Kavita

अनुगति कविता – पंचभूत से निर्मित ये तन | Anugati Kavita

अनुगति कविता अनुगति कविता पंचभूत से निर्मित ये तनअनुगति में सोता है।भ्रमण आत्मा का लेकिनजनम जनम का होता है।। मोहमाया के जाल में फंसकरखोता नित निज स्मृतियाँपूर्व जन्म के कर्मों से फिरलिखता नित निज नवकृतियाँसुखदुख के चक्रों में उलझ केखुद हंसता खुद रोता हैपंचभूत से निर्मित ये तनअनुगति में सोता…

Continue Readingअनुगति कविता – पंचभूत से निर्मित ये तन | Anugati Kavita

कृष्ण बाल लीला कविता | Krishna Bal Leela Kavita

कृष्ण बाल लीला कविता कृष्ण बाल लीला कविता अब आन बसौ मोहन मन में,तेरी सूरत मन को भावत है। बचपन में तू जीवन की सबै,खूब लीला करत दिखावत है। ठुमकत चलत बजै पैजनिया,तन मन में प्रीति जगावत है। किलकारी मार हसत आगन,जग भर में सबै हसावत है। बचपन का तेरा रूप सलोना,चंचल…

Continue Readingकृष्ण बाल लीला कविता | Krishna Bal Leela Kavita

मकसद पर कविता | Maksad Par Kavita

मकसद पर कविता मकसद पर कविता ज्ञान मंजिल तक पहुंचाता है पर मंजिल का पता हो ध्यान मकसद तक ले जाता है अगर ध्यान मकसद पर डटा हो  चूर चूर हो जाते हैं सारे सपने जब मार्ग ही लापता हो इच्छाएं सपने उद्देश्य पूरे होते हैं जब खुद में समर्पण की दक्षता हो  कहते हैं कर्म…

Continue Readingमकसद पर कविता | Maksad Par Kavita

Kavita On Papa In Hindi | पापा के लिए कविता 

Kavita On Papa In Hindi - आप पढ़ रहे हैं पापा के लिए कविता :- Kavita On Papa In Hindiपापा के लिए कविता मेरे लिए मेरा प्यार हैं मेरे पापाईश्वर का दिया हुआअनमोल उपहार हैं मेरे पापा मेरी एक पहचान हैं मेरे पापामेरी मुस्कान हैं मेरे पापामेरी जिंदगी मेरी जान…

Continue ReadingKavita On Papa In Hindi | पापा के लिए कविता 

तिरंगा पर कविता – तिरंगा शान से लहरे | Tiranga Par Kavita

तिरंगा पर कविता तिरंगा पर कविता तिरंगा शान से लहरेतिरंगा आन से फहरे। छुपा इतिहास गौरव का,समेटे भाव कुछ गहरे।निगाहों में सभी की मानऔ सम्मान बन ठहरे।अमिट पहचान दे यहविश्व में ऊँचा दिखाई दे,तिरंगा शान से लहरे,तिरंगा आन से फहरे। सजे सिन्दूर माथेभारती के रंग केसरिया ।धवल रंग इसका हैबहाता…

Continue Readingतिरंगा पर कविता – तिरंगा शान से लहरे | Tiranga Par Kavita

हिंदी ग़ज़ल समंदर सी आँखें | Hindi Ghazal Samandar Si Aankhein

हिंदी ग़ज़ल समंदर सी आँखें हिंदी ग़ज़ल समंदर सी आँखें समंदर-सी आँखें उधर तौबा-तौबाइधर डूब जाने का डर तौबा-तौबान कर ये, न कर वो, न कर तौबा-तौबायों गुज़री है सारी उमर, तौबा-तौबावो नज़रें बचाकर नज़र से हैं पीतेलगे ना किसीकी नज़र, तौबा-तौबाझुके थे वो जितना, हुआ नाम उतनाथा घुटनों में…

Continue Readingहिंदी ग़ज़ल समंदर सी आँखें | Hindi Ghazal Samandar Si Aankhein

Swatantrata Diwas Par Kavita | स्वतन्त्रता दिवस पर कविता

Swatantrata Diwas Par Kavita Swatantrata Diwas Par Kavita स्वतंत्र भारत देख रहे हैंआज हम-आप अपने सामने,पर सिद्ध हुआ क्या सपना वोजो देखा था उस हिंदुस्तान ने। कि जिस हिंदुस्तान के वीरहँसकर फंदा चूम गए,हम आप तो यहां दो नृत्य देख बसयूँ ही खुशी से झूम गए,  तो क्यों इस भारत…

Continue ReadingSwatantrata Diwas Par Kavita | स्वतन्त्रता दिवस पर कविता