लालसा पर कविता – लालसा न चाह की है | Lalsa Par Kavita

लालसा पर कविता लालसा पर कविता लालसा न चाह की है,जीवन में कुछ पाने को लालसा न बड़ा बनू,न बहुत कुछ कर जाने को छीन कर खुशियां किसी की,रोटियां दो वक्त की  मैं चलूं तारों को लाने,छोड़ इन्हें मर जाने को धिक्कार है जीवन को ऐसे,धिक्कारता हूं लोग को जो…

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गाँव की याद पर कविता | Gaanv Ki Yaad Par Kavita

गाँव की याद पर कविता गाँव की याद पर कविता यूँ ही बैठे-बैठे ख्याल आ गया,कि मन में हमारा गाँव आ गया।वो बचपन की मस्ती भरे रात-दिन,ये देखो मैं महुआ की छांव आ गया।। वो खेतों में जाना, वहां काम करना,मिले जब भी मौका तो भैसें चराना,कबड्डी, पकिल्लो, गुड़ी डण्डा,…

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अनुगति कविता – पंचभूत से निर्मित ये तन | Anugati Kavita

अनुगति कविता अनुगति कविता पंचभूत से निर्मित ये तनअनुगति में सोता है।भ्रमण आत्मा का लेकिनजनम जनम का होता है।। मोहमाया के जाल में फंसकरखोता नित निज स्मृतियाँपूर्व जन्म के कर्मों से फिरलिखता नित निज नवकृतियाँसुखदुख के चक्रों में उलझ केखुद हंसता खुद रोता हैपंचभूत से निर्मित ये तनअनुगति में सोता…

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कृष्ण बाल लीला कविता | Krishna Bal Leela Kavita

कृष्ण बाल लीला कविता कृष्ण बाल लीला कविता अब आन बसौ मोहन मन में,तेरी सूरत मन को भावत है। बचपन में तू जीवन की सबै,खूब लीला करत दिखावत है। ठुमकत चलत बजै पैजनिया,तन मन में प्रीति जगावत है। किलकारी मार हसत आगन,जग भर में सबै हसावत है। बचपन का तेरा रूप सलोना,चंचल…

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मकसद पर कविता | Maksad Par Kavita

मकसद पर कविता मकसद पर कविता ज्ञान मंजिल तक पहुंचाता है पर मंजिल का पता हो ध्यान मकसद तक ले जाता है अगर ध्यान मकसद पर डटा हो  चूर चूर हो जाते हैं सारे सपने जब मार्ग ही लापता हो इच्छाएं सपने उद्देश्य पूरे होते हैं जब खुद में समर्पण की दक्षता हो  कहते हैं कर्म…

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Kavita On Papa In Hindi | पापा के लिए कविता 

Kavita On Papa In Hindi - आप पढ़ रहे हैं पापा के लिए कविता :- Kavita On Papa In Hindiपापा के लिए कविता मेरे लिए मेरा प्यार हैं मेरे पापाईश्वर का दिया हुआअनमोल उपहार हैं मेरे पापा मेरी एक पहचान हैं मेरे पापामेरी मुस्कान हैं मेरे पापामेरी जिंदगी मेरी जान…

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तिरंगा पर कविता – तिरंगा शान से लहरे | Tiranga Par Kavita

तिरंगा पर कविता तिरंगा पर कविता तिरंगा शान से लहरेतिरंगा आन से फहरे। छुपा इतिहास गौरव का,समेटे भाव कुछ गहरे।निगाहों में सभी की मानऔ सम्मान बन ठहरे।अमिट पहचान दे यहविश्व में ऊँचा दिखाई दे,तिरंगा शान से लहरे,तिरंगा आन से फहरे। सजे सिन्दूर माथेभारती के रंग केसरिया ।धवल रंग इसका हैबहाता…

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हिंदी ग़ज़ल समंदर सी आँखें | Hindi Ghazal Samandar Si Aankhein

हिंदी ग़ज़ल समंदर सी आँखें हिंदी ग़ज़ल समंदर सी आँखें समंदर-सी आँखें उधर तौबा-तौबाइधर डूब जाने का डर तौबा-तौबान कर ये, न कर वो, न कर तौबा-तौबायों गुज़री है सारी उमर, तौबा-तौबावो नज़रें बचाकर नज़र से हैं पीतेलगे ना किसीकी नज़र, तौबा-तौबाझुके थे वो जितना, हुआ नाम उतनाथा घुटनों में…

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Swatantrata Diwas Par Kavita | स्वतन्त्रता दिवस पर कविता

Swatantrata Diwas Par Kavita Swatantrata Diwas Par Kavita स्वतंत्र भारत देख रहे हैंआज हम-आप अपने सामने,पर सिद्ध हुआ क्या सपना वोजो देखा था उस हिंदुस्तान ने। कि जिस हिंदुस्तान के वीरहँसकर फंदा चूम गए,हम आप तो यहां दो नृत्य देख बसयूँ ही खुशी से झूम गए,  तो क्यों इस भारत…

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आज़ादी का अमृत गीत | Azadi Ka Amrit Geet

आज़ादी का अमृत गीत आज़ादी का अमृत गीत आज़ाद वतन की माटीअब इतनी खामोश क्यों हैं ?आज़ादी में रहने की,क्या हमको कोई आदत ही नहीआज़ाद चमन है आज़ाद गगन हैपवन भी है आज़ाद अबडर दिल में, भय मन में औरसच कहने की आदत ही नही ।। आज़ादी का पावन पर्वक्यों…

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हिंदी कविता नायक | Hindi Kavita Nayak

हिंदी कविता नायक हिंदी कविता नायक नायक का किरदारजीवन के रंग मंच परशुरू होता हैशुरू से अंत तक, सुख दुःख के संगम मेंनहाकर,धोता है मन के मैल कोहंसाकर,कृष्ण और कंस काराम और रावण काद्रौपदी और दुशासन काराशियां तो एक हैंपर कर्म सोंच में भेद है कर्म ही बनाता हैनायकया फिर…

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रक्षाबंधन पर छोटी सी कविता | Rakshabandhan Ki Kavita

रक्षाबंधन पर छोटी सी कविता रक्षाबंधन पर छोटी सी कविता रेशम का रक्षासूत्र उनकी कलाई में,जो निकल आये हैं घरों सेहाथों में लेकर छिड़काव मशीनहमारें गली मुहल्ला सड़क परसाफ सफाई के लिएताकि हम रह सकेंहर तरह की वायरल जनित वायरस से सुरक्षित, उनके लिए ,जोअपना परिवार छोड़करआ गए है हमलोगों…

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