कान पर कविता – मैं कान हूं | Kaan Par Kavita

कान पर कविता कान पर कविता मैं कान हूंअपने जिम्मेदारियों सेपरेशान हूं।  गालियां हों या तालियांअच्छा हो या बुरा सबको सुनकर,सहकरहैरान हूं। खैर छोड़िए मैं कान हूं।  चश्में का बोझ ढोकरडंडियों से जकड़ा हुआ आंखों के मामलों में,मैं बना पहलवान हूं। खैर छोड़िए मैं कान हूं।  गलतियां हाथ की होया मुंह आंख कीमरोड़ा मैं जाता हूंइसलिए किमैं बेजुबान हूं। खैर छोड़िए मैं कान हूं। फैशन के झाला…

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हिंदी कविता दिल जोड़ दो | Hindi Kavita Dil Jod Do

हिंदी कविता दिल जोड़ दो हिंदी कविता दिल जोड़ दो यहां उनका भी दिल जोड़ दो जिनके दिल टूटे हैंचलते कदम थमे हैं,वो जीना जानते हैं ।ना  जख्मों को सीना जानते हैं ।। तुम उन्हें भी अपना लो ।प्यारे तुम मेरी बात मानविश्व बंधुत्व का भाव लेकर,जन- जन से बैर भाव छोड दो ।"यहा उनका भी दिल जोड़ दो"।। हम सब के ओ प्यारे,किस कदर हैं दूर किनारे।जीत की भी क्या आसरखते हैं मन मारे ? ये मन मैले नहीं निर्मल हैं,सबल न सही निर्बल हैं,समझते हैं हम जिन्हें नीचे हैं,वे कदम दो कदम ही पीछे हैं,जो हिला दे उन्हेंऐसी आंधी का रुख मोड़ दो ।यहाँ उनका भी दिल  जोड़ दो ।। दिल बिना क्या यह महफ़िल है,क्या जीने के सपने हैं,बेगाना कोई नहीं सब अपने हैं.ये सब मन के अनुभव हैं,नहीं हूँ अभी वो, पहले मैं था जो,सुना था मैंने मरना ही दुखद है,पर देखा लालसाओं के साथ जीना, महा दुखद है.फिर क्या है सुख ?क्या जीवन सार ?सुख है सब के हितार्थ में,जीवन - सार है अपनत्व में,ऐसा अपनत्व जो एक दूजे का दिल जोड़ दे ।कोई गुमनाम न हो नाम जोड़ दे ।।वरना सब असार है चोला,सब राम रोला भई सब राम रोला ।। पढ़िए :- कविता दु:ख की बदली | Kavita Dukh Ki Badl रचनाकार का परिचय यह कविता हमें भेजी है शिव कुमार साहू जी ने मु.सोनपुर, तह. रामानुज नगर, शहर- सूरजपुर, जिला-…

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हिंदी कविता स्त्री मन | Hindi Kavita Stree Man

हिंदी कविता स्त्री मन हिंदी कविता स्त्री मन स्त्री मन को यह जमाना नहीं समझ पाया,जब जब जमाने ने स्त्री को ठुकराया। तब स्त्री ने पुरुषों को भी मात देकर बताया,स्त्री तेरे मन को यह जमाना नहीं समझ पाया। तू कटती, जलती रही परिवार को भोजन खिलाने के लिए,तू मरती…

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गांधी जयंती पर कविता | Gandhi Jayanti Par Kavita

गांधी जयंती पर कविता गांधी जयंती पर कविता हे! मानव तू सीख सीख लेबापू जैसे इंसानों सेमानवता से निर्मित तन मनसत्य अहिंसा इमानों से, संत पुजारी देशभक्त तूजनहित में हो लोकप्रिय राष्ट्र पिता बापू जन जन काकरुणामय जन के प्राणप्रिय देख वेदना कष्ट मुसीबतभारत के नर नारी केत्याग दिया तब सूट…

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बाल गीत दो बहनें | Bal geet Do Bahne

बाल गीत दो बहनें बाल गीत दो बहनें सोच रहा था बहुत दिनों से मैं कुछ लिखना,एक थी लड़की जिसकी थी इक प्यारी बहना।दोनों बहने भोली-भाली दोनों सुन्दर,दोनों को ही मिले हुए थे एक-एक बन्दर।। बजा डुगडुगी दोनो बहनें खेल दिखातीं,छड़ी दिखाकर वो बन्दर को खूब नचातीं।दोनों बहने करती थीं…

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Teacher Day Kavita | टीचर डे पर कविता – गुरु महान

Teacher Day Kavita Teacher Day Kavita गुरु स्थान मन में ध्यान,धन्वी एकलव्य है महान,5-सितंबर दिवस महान,कर रहे याद गुरु महान। बिन गुरु न ज्ञान मिले,शिक्षा से शिक्षित हुए,गुरु कराये चरित्र निर्माण,बच्चे सबके बने महान। बना था हिन्द विश्व गुरु,हमें हो रहा देश पे गुरुर,गुरु को मिल रहा सम्मान,गुरु को शत-शत…

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बस्ते पर कविता – बहुत भारी बस्ता | Baste Par Kavita

बस्ते पर कविता बस्ते पर कविता शिशु है घर का गुलदस्ता,ढो रहा बहुत भारी बस्ता,खा रहा है स्कूल में पास्ता,जीवन हो गया है खस्ता। पीठ पर है बस्ते का भार,हो रहा अब जीवन भारसबके घर के हैं नौनिहाल,बुरा हो रहा उनका हाल। बच्चे जब स्कूल से आते,चेहरे उनके हैं उड़…

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हिंदी कविता मां की ममता | Hindi Kavita Maa Ki Mamta

हिंदी कविता मां की ममता हिंदी कविता मां की ममता सुबह एक दिन अपने घर मेंछत के एक अलग कोने मेंएक घोंसला सजा सलोनातिनकों के ताने बाने में मां की ममता का न्योछावर देखा मानो रसखानों में,मां लाती चुग चुग कर दानाबिखरे फैले मैदानों में चीं चीं करते चोंच खोलतेखाने को…

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स्वर्गीय माँ पर कविता – माँ नहीं हमारे पास | Swargiya Maa Par Kavita

स्वर्गीय माँ पर कविता स्वर्गीय माँ पर कविता धरती सूनी माँ सूना आँगनदेखो सूना है आकाश !बिना तुम्हारे सूना हैजीवन का मधुमास !तुम्ही बताओ खुद को कैसेआज यकीन दिलाऊँ !घर की चारदीवारी बोलेमाँ नहीं हमारे पास !! बिना तुम्हारे सूना हैजीवन का मधुमास !! माना मेरी साँसें भीआती जाती रहती…

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ज्ञान पर कविता – ज्ञान अनमोल खजाना है | Gyan Par Kavita

ज्ञान पर कविता ज्ञान पर कविता ज्ञान अनमोल खजाना है बांट सका है कौन इसे ?न भाई बंधु जमाना है,अनमोल रतन है हर रत्नों में पर इसको नहीं छुपाना है। ज्ञान की ज्योति जले घर-घर मेंज्योति से ज्योति जलाना है,घर-घर महके ज्ञान की खुशबू ज्ञान का अलख जगाना है। ज्ञान बिना मानव जीवन…

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सुख दुख कविता – एक दिन सुख दुःख | Sukh Dukh Kavita

सुख दुख कविता सुख दुख कविता भेंट हुआ एक दिन सुख दुःख कादुःख ने खबर लिया तब सुख का,दुःख बोली ओ! प्यारी बहनाकितना मुश्किल तुमसे मिलना रहती कहां?नहीं हो दिखतीहर कोई चाहे तुमसे मिलना,सुख ने दुःख को,गले लगा करभर मन में मुस्कान,मनोहर, दीदी!तुम तो, बड़ी सयानीअपनी बीती,कहो कहानी,दुःख ने सुख…

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हिंदी पर कविता – शब्दों की हिंदी भाषा | Hindi Par Kavita

हिंदी पर कविता हिंदी पर कविता स्वर ध्वनि शब्दों की हिंदी भाषाअमृत धारा सी बह रही हैरगो में शीतल सरिता सी चलकरसांसों के सागर में बह रही है।   अनमोल कितना मधुरमयी है दुनिया भी तुमको पहचानती हैतेरी प्रसंशा का राग की धुनसुबह सवेरे खूब बज रही है।  अरमान अभिमान सम्मान वैभवगौरव…

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