बचपन की यादों पर कविता :- बचपन की यादों ने फिर से

आप पढ़ रहे हैं बचपन की यादों पर कविता :- बचपन की यादों पर कविता बचपन की यादों ने फिर से लौटाया मोहक सा दृश्य अनोखा। जब हमने गांव की गलियों में बच्चो को कोलाहल करते देखा।। सहसा डूब गया स्मृतियों में देखे वही सारे बचपन के दृश्य। जो क्षण…

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प्रयास पर कविता | Prayas Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं प्रयास पर कविता :- प्रयास पर कविता जीवन की भुलभुलैया में बहुत हुआ मुझको अनुभव। गिर गिरकर खड़ा हुआ मै तब मिला सफलता का पथ नव।। प्रत्येक मोड़ पर हर मार्ग में मुश्किलें बांहे फैलाए खड़ी थी। दूर से लग रही थी तिनके सी गया समक्ष…

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दर्द भरी कविता :- यादों के दम पर | Dard Bhari Kavita

दर्द भरी कविता हम तो बस यादों के दम पर जिन्दगी जी जाएंगे । झेल कर लाखो सितम भी हम तुझे ही चाहेंगे ।। तुम मेरी आराधना हो साधना हो वंदना, तुम ही मेरे मन चमन के चंचरिक की कामना, मृगशिरा सी जल रही मरू भूमि की हो प्रार्थना, सावनी…

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कर्तव्य पर कविता :- धर्म से बड़ा कर्तव्य | Kartavya Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं हरीश चमोली जी द्वारा रचित ( Kartavya Par Kavita ) कर्तव्य पर कविता " धर्म से बड़ा कर्तव्य " :- कर्तव्य पर कविता कोई जीवन में आगे बढ़ता, कोई पीछे रह जाता है।कोई ठोकर खाकर भी,हर बार संभल नहीं पाता है।जो सुप्त पड़े हर जन-जन में,एक…

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होली पर हिंदी कविता | Holi Poem In Hindi

आप पढ़ रहे हैं होली पर हिंदी कविता :- होली पर हिंदी कविता रंग ही रंग होंगे चारो ओर समक्ष आयेगी जब होली। घर के आंगन में सजी होगी प्यारी सी मनमोहक रंगोली।। स्वर्ग जमी पर उतर आएगा प्रफुल्लित होंगे समस्त मानव। वसुधा पे इतना उल्लास देख भाग जाएंगे सारे…

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प्यार का इजहार कविता | Pyar Ka Izhaar Kavita

आप पढ़ रहे हैं प्यार का इजहार कविता :- प्यार का इजहार कविता स्वतः प्यार की जैसे आहट मिली हो तुम्हे देखकर मुस्कुराहट मिली हो, हृदय में जली ज्योत ऐसे जतन की बड़ी खूबसूरत बनावट मिली हो। तनिक मान जाओ तो मैं भी मना लूं तेरे हुस्न पर शायरी गुनगुना…

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किसान पर हिंदी कविता :- किसान का दर्द बताती कविता

हर मौसम में बिना किसी छुट्टी के काम करने वाले किसान पर हिंदी कविता :- किसान पर हिंदी कविता ज्येठ की सुलगती अग्नि में हल लगाने को मजबूर हुआ, प्रताड़ित होकर आपदाओं से, स्वखुशियों से ही दूर हुआ। खून पसीना बहा-बहाकर,जो एक-एक पाई जुटाता है, फिर चुकाने कुछ सूत-ब्याज, वह…

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मजदूर पर कविता | Mazdoor Par Kavita

मजदूर पर कविता मजदूर के भाग्य का कैसा, विपुल दुर्भाग्य होता है। हजारों बँगले बनाकर स्वयं, फुटपाथ पर सोता है। कमाने चार आने जो, आप पसीने में ही नहाता है, वो ठिठुर-ठिठुर फुटपाथों पर, सारी ही रात रोता है। दाल मखनी और पनीर तो बस सपने में खाता है, हाँ…

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हिंदी कविता कोरोना पर | Hindi Kavita Corona Par

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता कोरोना पर :- हिंदी कविता कोरोना पर तुझे क्या कहूं ? बीमारी कहूं कि बहार कहूं? पीड़ा कहूं कि त्यौहार कहूं? संतुलन कहूं कि संहार कहूं? कहो तुझे क्या कहूं? मानव जो उदंड था पाप भी प्रचंड था, सामर्थ का घमंड था प्रकृति को…

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दीपावली पर कविता | Deepawali Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं दीपावली पर कविता :- दीपावली पर कविता दीप मालाएं जलाकर,अंधियारा है मिटाना। रीत जो आती रही है, इस तरह से ही निभाना। अगर मिट जाते नहीं अंतर्मनों से द्वेष सारे। व्यर्थ फिर दीपक जलाना,है उचित उनको बुझाना। क्यूँ जला देते सभी है,एक पुतला शौक में यूँ?…

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याद पर कविता :- अचानक याद उसकी आई | Yaad Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं याद पर कविता :- याद पर कविता अचानक याद उसकी आई नादान दिल घबरा गया सावन में पवन का झोंका दिन में मुझको डरा गया ये हवा मजाक उड़ाती मेरा कहती है क्या हुआ इस बार कहां खो गए वह प्रेम के झूले और रंग-बिरंगे फूलो…

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हास्य कविता भाग्य की रेखा | Hasya Kavita Bhagya Ki Rekha

आप पढ़ रहे हैं हास्य कविता भाग्य की रेखा ( Hasya Kavita Bhagya Ki Rekha ) :- हास्य कविता भाग्य की रेखा मेले में हुए प्रथम दर्शन टिक्की खाते उसको देखा। सहसा उर से आयी आवाज यही है मेरे भाग्य की रेखा।। आंखो में बसी मासूमी थी मुख पर थी…

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