कुर्सी पर कविता :- ओ प्यारी कुर्सी | Kursi Par Kavita
कुर्सी तो लगभग हर घर में होती है और आप सभी उसे देखते भी होंगे। लेकिन एक कवि उस किस तरह से देखता है आइये जानते हैं हरीश चमोली जी की ( Kursi Par Kavita ) कुर्सी पर कविता " ओ प्यारी कुर्सी " कुर्सी पर कविता कुर्सी-कुर्सी, ओ प्यारी…

