कविता बरसो मेघा प्यारे | Kavita Barso Megha Pyare
आप पढ़ रहे हैं कविता बरसो मेघा प्यारे :- कविता बरसो मेघा प्यारे भयंकर गर्मी चहूं ओर, त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहे सारे। मोर बोले मेव आओ-मेव आओ,अब तो बरसो मेघा प्यारे। उमड़ घुमड़ कर आओ, कर दो वारे-न्यारे। ताल-तलैया सब भर दो, खूब बरसो मेघा प्यारे। गगन में तेज गर्जना,…

