रक्षाबंधन पर कविता | Rakshabandhan Par Kavita

रक्षाबंधन पर कविता रक्षाबंधन पर कविता मैं बहना ,भाई ना मेरे राखी बिकते प्यारे प्यारे राखी आते,मन भर जातेकिसे बांध मैं मन बहलाऊं,कैसे मैं त्योहार मनाऊं। प्रीत की बंधन के धागा कोबांध के टालूं हर बाधा कोकिस भाई को बांध कलाईरिश्तों में विश्वास जगाऊं,कैसे मैं त्योहार मनाऊं। मेरे भी गर भाई होतामैं राखी वह कंगन लाताथाली भर मैं प्यार सजाकर किस भाई पर प्यार लुटाऊं,कैसे मैं त्योहार मनाऊं। छोटा होता प्यार लुटातीआशीर्वाद बड़ा से पातीमीठे मधुर मिठास बढ़ा करकिसको विजया तिलक लगाऊं?कैसे मैं त्योहार मनाऊं। मात- पिता भाई में देखूं बांध गांठ रिस्तें को रख्खूंबिन भाई के जीवन कैसा?खुद को आज पराई पाऊं,कैसे मैं त्योहार मनाऊं। भाई का होना ना होना क्या कर सकती कोई बहनाखुद में खुद को भाई देखूं खुद को खूब मजबूत बनाऊं,अब ऐसे त्योहार मनाऊं। खुद भाई खुद बहना बनकरजीवन जी लूं आगे बढ़करमात पिता अपने में पाकरबेटी बेटा मैं बन जाऊं,अब ऐसे त्योहार मनाऊं। करुं अपेक्षा रक्षा का क्योंअबला से सबला हो ना क्योंइस अन्तर को मैं झुठलाकर खुद की रक्षा खूब कर पाऊं। अब ऐसे त्योहार मनाऊं। पढ़िए :- रक्षाबंधन को समर्पित शायरी संग्रह रचनाकार का परिचय यह कविता हमें भेजी है रामबृक्ष कुमार जी ने अम्बेडकर नगर से। “ रक्षाबंधन पर कविता ” ( Rakshabandhan Par Kavita ) आपको कैसी लगी ? “…

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पर्यावरण संरक्षण हिंदी कविता | Paryavaran Sanrakshan Par Kavita

पर्यावरण संरक्षण हिंदी कविता पर्यावरण संरक्षण हिंदी कविता एक बार की बात लगाया उस पौधे पर हाथलजाई दूल्हन मानो रातपूछा कैसा शरम हयातमैंने क्या कर दी तेरे साथ? शहमी ठहरी थी कुछ देरफिर वह हल्की भरी हिलोरतन के खड़ी हुई भर जोरतब वह बोली मीठी बोल,मेरा छुईमुई पहचान लाजवंती क्यों…

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आजादी पर हिंदी कविता – तिरंगे को पकड़े | Azadi Par Hindi Kavita

आजादी पर हिंदी कविता आजादी पर हिंदी कविता यहां से वहां तकजहां न तहां तकमुट्ठी को जकड़ेतिरंगे को पकड़े थें निकले दिवानेआजादी को पाने,आजादी में आगेथे आजाद भागे इंकलाब जय कीभारत विजय कीलगते थे नारेगलियों में सारे, सिंहनाद जन जन गरजते थे गर्जनलिए जोश जज्बागली कूच कस्बा आजादी को लानेचले थे दिवाने ,कहानी…

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मुलाकात पर कविता | Mulakat Par Kavita

पढ़िए रामबृक्ष कुमार जी द्वारा रचित मुलाकात पर कविता :- मुलाकात पर कविता चलता गयाचलता रहा मिलता रहाहर लोग से,जीवन सफ़रकटता रहामुड़ता गयाहर मोड़ पे, जितने मिलेजैसे मिलेअपने मिलेंया गैर हो,कहता गयादेता गयाशुभकामनासब खैर हो , आता गया फिर मोड़ थाडगमग डगरका अंत वह,डूबता दिन था अंधेराआंधी चली अब मंद बह, दिखता नहीथा सामनेउठता…

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आंगन पर कविता | बांटों ना आंगन बन्धु | Angan Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं रामबृक्ष कुमार जी द्वारा रचित आंगन पर कविता " बांटों ना आंगन बन्धु " :- आंगन पर कविता बांटों ना आंगन बन्धु! आज तोड़ो ना रिस्तें मधुर आज।  तुलसी सी मां-ममता महकेघर का कोना कोना गमकेजीवन की ज्योति सदा चमकेंबजता है जिसमें प्रेम साज।  बांटों ना आंगन…

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प्रतिभा पलायन पर कविता | Pratibha Palayan Par Kavita

प्रतिभा पलायन पर कविता प्रतिभा पलायन पर कविता मन में है विदेशी नोट का ख्वाब,परदेशों की ओर हो रहा झुकाव,प्रतिभा पलायन का हो रहा बहाव,हो रहा राष्ट्र का क्यों बिखराव ? जिस मां की कोख ने जनम दिया,नहीं कभी उसकी परवाह किया,अर्थ लालच में परित्याग किया,राष्ट्र विकास अपना भुला दिया।…

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जीवन का सफर कविता | Jeevan Ka Safar Kavita

जीवन का सफर कविता - आप पढ़ने जा रहे हैं सदानन्द प्रसाद जी द्वारा रचित " जीवन का सफर " जीवन का सफर कविता कांटे भरा है पूरा रास्ता,कैसा है जीवन से वास्ता,जब पास नहीं रहे पैसा,जीवन का सफर है कैसा! बारिश में न बूंदें टपकी,किसी को न आई झपकी,भुखमरी…

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प्रभु पर कविता | Prabhu Par Kavita

प्रभु पर कविता - पढ़िए सदानन्द प्रसाद जी द्वारा रचित प्रभु पर कविता " प्रभु ने रचा है ऐसा संसार " :- प्रभु पर कविता प्रभु ने रचा है ऐसा संसार,जीवों के हैं अनेक प्रकार,सबके नहीं मिलते आकार,प्रभु हैं अद्भुत कलाकार। आप हैं ईश्वर निराकार,जीवों को बना दिया साकार,कैसा दिया…

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Bachpan Par Kavita | बचपन पर कविता

Bachpan Par Kavita - आप पढ़ रहे हैं कवि सदानन्द प्रसाद जी की द्वारा रचित बचपन पर कविता " बचपन का वो क्षण-क्षण " :- Bachpan Par Kavita बचपन का वो क्षण-क्षण,मेरा मन करता था टन-टन,याद आया गांव का कण-कण,आज खुश नहीं है तन-मन। खेलते थे संग वो दिन सखा,सोचकर…

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Best Poem On Pen In Hindi | कलम पर कविता

Poem On Pen In Hindi - आप पढ़ रहे हैं कलम पर कविता " कलम हूं कलम मैं " :- Poem On Pen In Hindi कलम पर कविताकलम हूं कलम मैंअनोखी कलम हूं।  कोरा था कागजथी मंजिल सफर परचली चाल टेढ़ीपकड़ कर डगर को कभी हाथ जज केमुकद्दर लिखी हूंकभी…

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Hindi Ka Mahatva Par Kavita | हिंदी का महत्व पर कविता

Hindi Ka Mahatva Par Kavita - आप पढ़ने जा रहे हैं हिंदी का महत्व पर कविता :- Hindi Ka Mahatva Par Kavita हिंदी का महत्व क्या है- इक कुपढा मुझसे पूछता है, हिंदी के अपवादों के भीतर तर्क लग्न से खोजता है,हिंद-शब्द मुँह से फूट पड़ने पर  मुँह को अपने मसोसता…

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आधुनिक शिक्षा पर कविता | Adhunik Shiksha Par Kavita 

आधुनिक शिक्षा पर कविता | Adhunik Shiksha Par Kavita आधुनिक शिक्षा पर कविता शिक्षित से अच्छा अनपढ़ थाफिर भी शिक्षित से बढ़कर थाअपने अपनों का अपनापनसुशीतल मधुर सुधाकर था अब अनपढ़ से मैं शिक्षित हूंसंस्कारों से परिशिक्षित हूंफिर भी न जाने क्यूं खुद सेखुद ही खूब मैं लज्जित हूं …

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