कविता जीने का सहारा हूं मैं | Kavita Jeene Ka Sahara Hun
आप पढ़ रहे हैं ( Kavita Jeene Ka Sahara ) कविता जीने का सहारा हूं मैं :- कविता जीने का सहारा हूं मैं न महलों बीच उजाला हूं मैंन ज्वालामुखी का ज्वाला हूं मैं न आसमान का तारा हूं मैंन मेघ बीच चंचल चपला,न अग्नि बीच अंगारा हूं मैं मन उदास जीवन निराशहर दिन…

