रामबृक्ष कुमार

कविता दु:ख की बदली | Kavita Dukh Ki Badli

आप पढ़ रहे हैं ( Kavita Dukh Ki Badli ) कविता दु:ख की बदली :-

कविता दु:ख की बदली

कविता दु:ख की बदली

रात भयानक थी काली
न निशाकर की कर की जाली
सांय सांय सन्नाटा की ध्वनि
फैली तरु की डाली डाली

निशीथ सघन काले धन की
मन पर छाई दु:ख की बदली
व्याकुल तन विकृत मन
सोंचा खुशियों का अब हुआ अंत

क्या जीवन यह अंतिम पहली
मन पर छाई दु:ख की बदली
नि:शब्द ध्वनि अंत:मन की
कंटक कष्ट तो है पथ की

सुख दु:ख जीवन के दो पहलू
दु:ख को पहले क्यों ना सहलू
धर,धैर्य समय का फेरा है
ग्रहण सूरज को घेरा है

फिर होगा अरुणामय अहन्
छट जाएगा यह मेघ गहन
मिट जाएगी व्यथा मन की
मन पर छाई दु:ख की बदली

पढ़िए :- कविता दर्द दिया तकदीर ने | Kavita Dard Diya Takdeer Ne


रचनाकार का परिचय

रामबृक्ष कुमार

यह कविता हमें भेजी है रामबृक्ष कुमार जी ने आंबेडकर नगर से।

“ कविता दु:ख की बदली ” ( Kavita Dukh Ki Badli ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email
Guru Mahima Par Kavita

Guru Mahima Par Kavita | Best Poem On Teacher

Guru Mahima Par Kavita आप पढ़ रहे हैं गुरु महिमा पर कविता :- Guru Mahima Par Kavitaगुरु महिमा पर कविता आंख मूंद

Shikshak Par Hindi Kavita

Shikshak Par Hindi Kavita | Beautiful Poem On Teachers

Shikshak Par Hindi Kavita आप पढ़ रहे हैं शिक्षक पर हिंदी कविता :- Shikshak Par Hindi Kavitaशिक्षक पर हिंदी कविता शिक्षा देने

1 thought on “कविता दु:ख की बदली | Kavita Dukh Ki Badli”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *