कविता क्या लिखूँ | Hindi Kavita Kya Likhun

आप पढ़ रहे हैं ( Hindi Kavita Kya Likhun ) कविता क्या लिखूँ :- कविता क्या लिखूँ कुछ गहरा सा लिखना था, कविता से ज्यादा क्या लिखूँ ? कुछ कीर्तन सा लिखना था, आरती से ज्यादा क्या लिखूँ ? कुछ ठहरा सा लिखना था, दर्द से ज्यादा क्या लिखूँ ?…

Continue Readingकविता क्या लिखूँ | Hindi Kavita Kya Likhun

पिता पर कविता – श्रद्धेय पिता जी | Pita Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं ( Pita Par Kavita ) पिता पर कविता :- पिता पर कविता पूज्य पिता जी की,कोमल छांव को किन शब्दों में उल्लेख करूँ । निर्णय लिया आज जीवन की पुस्तक के उन,पन्नों को पढ़ लूं । प्रतीत ऐसा हो रहा, मैं अतीत आज, वर्तमान बना लूं…

Continue Readingपिता पर कविता – श्रद्धेय पिता जी | Pita Par Kavita

रहीम के दोहे समय पर | रहीम के 10 दोहे | Rahim Ke Best Dohe Samay Par

रहीम के दोहे समय पर - आप पढ़ रहे हैं ( Rahim Ke 10 Dohe ) रहीम के दोहे समय पर :- Rahim Ke Dohe Samay Parरहीम के दोहे समय पर 1. समय परे ओछे बचन, सब के सहै रहीम।सभा दुसासन पट गहे, गदा लिए रहे भीम॥ अर्थ :- रहीमदास…

Continue Readingरहीम के दोहे समय पर | रहीम के 10 दोहे | Rahim Ke Best Dohe Samay Par

Mata Pita Par Kavita | माता पिता पर कविता | New Poem Dedicated To Parents

आप पढ़ रहे हैं ( Mata Pita Par Kavita ) माता पिता पर कविता :- Mata Pita Par Kavitaमाता पिता पर कविता न जाने वो दिल में अपनेकितने दर्द छिपाते हैंवो तो संग हमारेसदा ही मुस्कुराते हैं,होते हैं परेशां जब भीजरा न हमको जताते हैंवो तो संग हमारेसदा ही मुस्कुराते…

Continue ReadingMata Pita Par Kavita | माता पिता पर कविता | New Poem Dedicated To Parents

जुदाई पर कविता | Judai Par Kavita | Poem On Separation

आप पढ़ रहे हैं ( Judai Par Kavita ) जुदाई पर कविता :- जुदाई पर कविता जिन्दा हूँ पर बेजान हो गया हूँबिना तेरे वीरान हो गया हुँ,घर की रौनक खो गई है कहींजैसे सूना मकान हो गया हूँ ।। मौसम है ये इश्क़ मे जुदाई कातुझ बिन सूखा मैदान…

Continue Readingजुदाई पर कविता | Judai Par Kavita | Poem On Separation

संगीत दिवस पर कविता | Sangeet Diwas Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं 21 जून को मनाए जाने वाले ( Sangeet Diwas Par Kavita ) संगीत दिवस पर कविता :- संगीत दिवस पर कविता आना है और चलें जाना है! जीवन का चलन पुराना है!! जीवन का नहीं ठिकाना है! जन्म लिया तो मर जाना है!! गाना और बजाना…

Continue Readingसंगीत दिवस पर कविता | Sangeet Diwas Par Kavita

कविता सारी उम्र गुजारी हमने | किसान के दर्द पर कविता

आप पढ़ रहे हैं ( Kavita Sari Umra Gujari Humne ) किसान के दर्द पर कविता सारी उम्र गुजारी हमने :- कविता सारी उम्र गुजारी हमने सारी उम्र गुजारी हमने, किसान बन खेती करने में। शीत,ताप सब सहते है, पीछे नही श्रम करने में। भोर हुई निकल पड़ते, ले कुदाली…

Continue Readingकविता सारी उम्र गुजारी हमने | किसान के दर्द पर कविता

हिंदी कविता मेरे हमदम | Hindi Kavita Mere Humdum

आप पढ़ रहे हैं ( Hindi Kavita Mere Humdum ) हिंदी कविता मेरे हमदम :- हिंदी कविता मेरे हमदम आ जा रे मेरे हमदम। साथ देना मेरा हरदम। नही छोडना कभी मेरा हाथ। जीवन भर निभाना मेरा साथ। मानते रहोगे मेरी बात। नही मिलेगी कभी मात। भूलती हूं तेरी संग…

Continue Readingहिंदी कविता मेरे हमदम | Hindi Kavita Mere Humdum

Paryavaran Par Kavita | पर्यावरण पर कविता | Save Environment

आप पढ़ रहे हैं ( Paryavaran Par Kavita ) पर्यावरण पर कविता :- पर्यावरण पर कविताParyavaran Par Kavita शस्य-शस्य द्रुम दल हैंवसुन्धरा का आवरणप्रकृति से सौगात मिलीकिया धरा ने सहर्ष वरण ।। सघन वनों से सजी अवनि थीआलौकिक, मोहक था संसारखिलते,मुस्काते थे सुमन अनंतअलि, कलियाँ संग करते,मृदुल झंकार। तृप्ति,स्मित,रश्मियों के…

Continue ReadingParyavaran Par Kavita | पर्यावरण पर कविता | Save Environment

फूल और कांटे कविता | Phool Aur Kante Kavita

आप पढ़ रहे हैं ( Phool Aur Kante Kavita ) फूल और कांटे कविता:- फूल और कांटे कविता जन्म लिया एक पौधे में, एक थी शाखा, पौधे ने फूल, कांटों को, था एक सा पाला। बरसीं थीं एक सीं, घटाएँ भी उन पर, हवाएँ भी एक जैसी, बहतीं रहीं मुस्कुराकर।…

Continue Readingफूल और कांटे कविता | Phool Aur Kante Kavita

हिंदी कविता बड़ा अभिमान था | Kavita Bada Abhiman Tha

आप पढ़ रहे हैं ( Kavita Bada Abhiman Tha ) हिंदी कविता बड़ा अभिमान था :- हिंदी कविता बड़ा अभिमान था रूप लावण्य पर कभी नाजो गुमान था। सुन्दर देह पर कभी बड़ा अभिमान था।। ली करवट जिन्दगी ने, प्राणो ने तज दिया शरीर।सन्नाटे का आलम था, सबकी भावभंगिमा थी…

Continue Readingहिंदी कविता बड़ा अभिमान था | Kavita Bada Abhiman Tha

Pita Par Kavita | पिता पर कविता :- उपकार पिता के

आप पढ़ रहे हैं ( Pita Par Kavita ) पिता पर कविता :- पिता पर कविताPita Par Kavita उपहार पिता केगिनती करना मुश्किल है,उपकार पिता केगिनती करना मुश्किल है। नश-नश में जिसका रक्त बहेरहे स्वाभिमान से भरा-भरा,नभ भी मानो छोटा लगताघर आँगन हो हरा-हरा, इज्जत, शौहरत, रुतबे कादम भरतें है…

Continue ReadingPita Par Kavita | पिता पर कविता :- उपकार पिता के