हिंदी कविता व्यथा भारत की | Hindi Kavita Vyatha Bharat Ki
आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता व्यथा भारत की :- हिंदी कविता व्यथा भारत की एक लड़ाई मेरे बाहर, एक लड़ाई अन्दर है। मैं ही जानूँ मेरे गम का, कितना बड़ा समन्दर है ।। तान खड़ी हैं भौहें अपनी , कुछ मेरी विपदाएं। दाँव देखते सगे पड़ोसी, आयुध कैसा बरसायें।…

