हिंदी कविता कर्महीन नर | Hindi Kavita Karmheen Nar
आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता कर्महीन नर :- हिंदी कविता कर्महीन नर है कर्महीन नर निज पशुता सम, पथहीन निराश्रित विषय विषम। मानव तन है मूल्यवान निज कर्तव्यो से मत भागो तुम, गफलत की नींद बहुत सोए उठो नींद से जागो तुम। अर्जुन सा लक्ष्य रखो अपना बस लक्ष्य…

