हरीश चमोली

कलम पर कविता :- कलम की ही जय कहूँगा | Best Poem On Pen In Hindi

कलम पर कविता Poem On Pen In Hindi क्रांति सिर्फ बंदूकों से ही नहीं आती, कलम से भी आती है। बन्दूक से तो किसी को डराया, धमकाया या मारा जा सकता है लेकिन बदला नहीं जा सकता। वहीं कलम से सरे देश की विचारधारा को बदला जा सकता है। कलम की जंग बंदूकों की जंग से भी बड़ी होती है। कलम पर कविता में कलम की इसी महानता को प्रस्तुत किया गया है। आइये पढ़ते हैं कलम पर कविता में :-

Poem On Pen In Hindi
कलम पर कविता

कलम पर कविता

कब हुआ?कैसे हुआ? यह न कभी मैं जान पाया।
भटकता था बधिर बन,अब लक्ष्य का ध्यान आया।
देर से ही सही,पर अपने,हुनर को पहचान पाया।
अज्ञानता के अंधकार में,ज्ञानरूपी प्रकाश छाया।

समय शेष है बचा अभी,कलम अब पुकारती है।
सुप्त थी जो पड़ी हुई,वह लेखनी अब दौड़ती है।

झकझोरती है कलम मेरी,लिखने को मचलती है।
आग जो छिपी हृदय में, वह लेखन को सुलगती है।
छोड़ देता हर मुसाफिर, साथ जीवनभर न कोई चलता
हमसफ़र बन कलम अपनी, हर वक़्त साथ चलती है।

जो गंवाया वक़्त पहले, उसके लिए धिक्कारती है।
सुप्त थी जो पड़ी हुई, वह लेखनी अब दौड़ती है।

कभी लिखूं, मैं कलम से, अपने हृदय की वेदना को।
झकझोरता हूँ कभी मैं, शीतल पड़ी जड़ चेतना को।
कभी प्रेम के गीत लिख दूँ, कभी मैं कोई शौर्य गाथा।
अटूट शक्ति तुझमें निहित, करूँ नमन झुकाके माथा।

बिन कहे भी बहुत कुछ यह, महिफ़िलों में बोलती है।
सुप्त थी जो पड़ी हुई, वह लेखनी अब दौड़ती है।

वीर शहीदों की चिताओं से, उठती अग्नि लपटें लिखूँ।
कभी प्रेम भरी रात में, चादरों पर पड़ी सलवटें लिखूं।
श्रृंगार के मैं गीत झर दूँ, कुछ वीरता भरी कहानियाँ।
सभ्यता का गान लिखूँ, तो कभी टूटती संस्कृतियाँ।

ज्ञात मुझे है,यह दुनियाँ भी, इक रोज साथ छोड़ती है।
सुप्त थी जो पड़ी हुई,वह लेखनी अब दौड़ती है।

फौज में न सही,पर मौज में हूँ, कलम का मैं सिपाही हूँ।
कूटनीति,राजनीति में मैं, अभी बस इकाई-दहाई हूँ।
प्रखर कलम की धार लेकर, सत्य की ही राह चलूंगा।
अंतिम अपनी साँस तक मैं, कलम की ही जय कहूँगा।

देश हित ही चले लेखनी, यही सदा कोशिश रहती है।
सुप्त थी जो पड़ी हुई, वह लेखनी अब दौड़ती है।

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रचनाकार का परिचय

हरीश चमोली

मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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