घर के बंटवारे पर कविता :- बँटवारे का माहौल
आप पढ़ रहे हैं घर के बंटवारे पर कविता :- घर के बंटवारे पर कविता तन्हाईयों का शोर फिर से, गूँजने लगा है शहर में। जाने क्या से क्या हुआ ये, सोच रहे हैं डर ही डर में। कुछ रिश्तेदारों के सम्मुख, बैठ गए सब आँगन में, बँटवारे का माहौल…

