मन में मधुमास आ गया हिंदी कविता

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता मन में मधुमास आ गया  :-

मन में मधुमास आ गया

मन में मधुमास आ गया

मेरे उर अन्तस्थल को,
जब से स्नेह मिला है तेरा ।
पतझड़ से नीरस मन में मधुमास आ गया।

बिखर रहीं थीं मन की लड़ियाँ ,
तुमनें उन्हें पिरो डाली ।
जिससे पहुँचूं स्नेह लक्ष्य तक ,
पथ आलोकित कर डाली ।।
अब जीवन लय संगीत बनेगा,
मन में यह विश्वास आ गया ।।1।।
पतझड़ से नीरस मन में मधुमास आ गया।

रूप प्रभा की आभा प्रेयसि ,
मन में इस तरह फैल रही है ।
जैसे गीत ज्ञान की गंगा में ,
कविता अविरल तैर रही है ।।
जो बिखर चला था जीवन में ,
वह सब मेरे पास आ गया ।।2।।
पतझड़ से नीरस मन में मधुमास आ गया ।

हृदय प्रदेश के खाली पन में ,
यादों के पौध लगा डाली ।
उर्वरक डाल कर संवादों की ,
कलियों को कुसुम बना डाली ।।
इस उपवन के सुगन्ध से,
मेरे छन्दों में अनुप्रास आ गया ।।3।।
पतझड़ से नीरस मन में मधुमास आ गया।

चाँदनी सुशोभित मस्तक प्रेयसि ,
नयनों में प्रश्न घूमते सारे ।
जगमगा रहे हैं नव यौवन में ,
तेरे सूरज चाँद सितारे ।।
सपनों की छाया मे अरी सुनयने !,
अब तेरा आकाश आ गया ।।4।।
पतझड़ से नीरस मन में मधुमास आ गया।

पढ़िए :- हिंदी कविता ज़िन्दगी पर “पढ़ो तो किताब है जिदंगी”


रचनाकार का परिचय

रूद्र नाथ चौबे ("रूद्र")नाम – रूद्र नाथ चौबे (“रूद्र”)
पिता- स्वर्गीय राम नयन चौबे
जन्म परिचय – 04-02-1964

जन्म स्थान— ग्राम – ददरा , पोस्ट- टीकपुर, ब्लॉक- तहबरपुर, तहसील- निजामाबाद , जनपद-आजमगढ़ , उत्तर प्रदेश (भारत) ।

शिक्षा – हाईस्कूल सन्-1981 , विषय – विज्ञान वर्ग , विद्यालय- राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबरपुर , जनपद- आजमगढ़ ।
इंटर मीडिएट सन्- 1983 , विषय- विज्ञान वर्ग , विद्यालय – राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबर पुर , जनपद- आजमगढ़।
स्नातक– सन् 1986 , विषय – अंग्रेजी , संस्कृत , सैन्य विज्ञान , विद्यालय – श्री शिवा डिग्री कालेज तेरहीं कप्तानगंज , आजमगढ़ , (पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर ) उत्तर प्रदेश।

बी.एड — सन् — 1991 , पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर , उत्तर प्रदेश (भारत)
साहित्य रत्न ( परास्नातक संस्कृत ) , हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद , उत्तर प्रदेश

पेशा- अध्यापन , पद – सहायक अध्यापक
रुचि – आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ , हिन्दी साहित्य , हिन्दी काव्य रचना , हिन्दी निबन्ध लेखन , गायन कला इत्यादि ।
अबतक रचित खण्ड काव्य– ” प्रेम कलश ” और ” जय बजरंगबली “।

अबतक रचित रचनाएँ – ” भारत देश के रीति रिवाज , ” बचपन की यादें ” , “पिता ” , ” निशा सुन्दरी ” , ” मन में मधुमास आ गया (गीत) ” , ” भ्रमर और पुष्प ” , ” काल चक्र ” , ” व्यथा भारत की ” इत्यादि ।

“ मन में मधुमास आ गया ” ( Hindi Kavita Man Me Madhumas ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published.