राम मंदिर जीत पर कविता :- मिल गयी है जीत उनको

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राम मंदिर जीत पर कविता

राम मंदिर जीत पर कविता

मिल गयी है जीत उनको, जो चले थे सत्य पथ पर।
मुख मलिन उनका हुवा जो, थे चढ़े अन्याय रथ पर।
रो रही थी जो अयोध्या, रघुवंश के श्री राम खातिर,
बाँह फैलाये आज खड़ी वो, श्री राम के स्वागत पर।

राह तक रही शबरियाँ, करों में अपने बेर लाकर।
मुक्ति भी पायी अहिल्या, प्रभू चरण धुली पाकर।
अश्रुओं से नयन भीगे, कृतार्थ हुवे सब काल के,
स्वागत में सभी खड़े हैं, प्रभु श्री रामचंद्र कृपाल के।

नगर नगर,हर गांव गांव भी, दीपमालाओं से सजा है।
भारत वर्ष के हर कोने पर, श्रीराम की फहरी ध्वजा है।
आज दीवाली-होली दोनों, प्रभु स्वागत में नाच रही,
राम शरण में जीना मजा,बिन राम तो जींवन सजा है।

अपने नगर से दूर हो गए,माँ की आज्ञा मानने हित।
यातनाओं को भोगकर भी,कर न पाए कोई अहित।
हम सभी राम रहें जीवन में,धर्म की डगर चलकर,
ऐसा दो आशीष हमें प्रभु,करो हमारा पथ प्रदर्शित।

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रचनाकार का परिचय
हरीश चमोलीमेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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