हिंदी कविता प्रेम कलश | Hindi Kavita Prem Kalash

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता प्रेम कलश :-

हिंदी कविता प्रेम कलश

हिंदी कविता प्रेम कलश

प्रेम कलश ( प्रथम सर्ग — प्रस्तावना )

प्राक्कथन — ” प्रेम कलश ” शीर्षक की रचना , कल्पना जगत के आकाश से प्राप्त प्रेम कलश नामक कलश से उत्पन्न हुई है ।

प्रेम कलश की प्रेम भित्ति पे,
प्रेम चिन्ह अंकित था ।
स्वस्तिक वन्दनवारों से वह ,
पूरी तरह अलंकृत था–1

विश्व सुगन्धित सुमनों की थी
बनी प्रेम की माला ।
प्रेम कलश पर पड़ी हुई थी ,
बिखराती प्रेम उजाला–2

प्रेम नीर से भरा हुआ था ,
फूलों के मकरन्द घुले ।
आनन्द सुगन्ध सुवासित जल में,
प्रेम शक्ति के छन्द मिले–3

मधु घृत शर्करा समन्वित जल में ,
हल्दी चन्दन साकार हुआ ।
केशर गुलाब औ लिली फूल से,
प्रेम का रस तैयार हुआ–4

प्रेम के रस का प्रेम पात्र ले ,
काम हाथ में आया ।
अपने हाथों प्रेम कलश में ,
प्रेम का रस है मिलाया–5

प्रेम कलश पर प्रेम दीप ,
अविराम जला करता था ।
मानो पूर्ण अवधि होने का ,
संदेश दिया करता था–6

पूर्ण अवधि होने पर उस ,
प्रेम कलश में ज्वार हुआ ।
प्रेम कलश औ प्रेम दीप से ,
दो जन का अवतार हुआ–7

प्रेम दीप की प्रेम शिखा से ,
शिव प्रेमी अवतार लिया ।
प्रेम कलश के मादक जल से,
शिवा रूप साकार लिया–8

काल चला अपनी गति से ,
दोनों में किशोरता आयी ।
काल नियम अविचल होता है,
दोनों में मादकता छायी–9

एक बार शिव और शिवा ,
दोनों में साक्षात्कार हुआ ।
अपलक दृष्टि बनीं दोनों की,
सिहरन का संचार हुआ–10

दोनों में नामकरण परिचय ,
औ कुछ अनजानी बात हुई ।
बप गया प्रेम का बीज वहीं ,
औ मधुरस की बरसात हुई–11

दोनों के गहरे प्रेम अतल से ,
प्रेम कलश का गीत बना ।
शिव और शिवा के जीवन का ,
आनन्दमयी संगीत बना–12

प्रेम कलश की प्रेम मल्लिका,
बिखरी गीत के वन्दों में ।
माला के सुमनों की लड़ियाँ,
घुली काव्य के छन्दों में–13

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

3 thoughts on “हिंदी कविता प्रेम कलश | Hindi Kavita Prem Kalash”

  1. जितेन्द्र जी

    बहुत ही सुंदर रचना। वियोग शृंगार का अच्छा वर्णन, प्रकृति वर्णन वर्णन भी अच्छा है। नायिका के विरह को और दर्शाया जा सकता था। नायक-नायिका के बिछड़ने का कारण स्पष्ट नहीं है। छंदों में कसावट नहीं है, लयबद्धता की कमी है, पढ़ने में खटकते हैं। कहीं- कहीं व्याकरणात्मक त्रुटियां हैं। भावों के दृष्टिकोण से अच्छी रचना।

  2. Adarnya jitendra ji ! Apne reaction diya ki rachna sundar h , bhav achchhe hain , viyog aur sanyog ka varnan bhi bhut khoobsoorat dhhang se kiya gya h .
    Fir ye kahna ki kasavat nhi chhadon me , laybadhata nhi h , avashyak aur uchit nhi lgta , kyuki har vyakti apne andaj me read krta h . Mujhe aisa kuchh nhi lgta . Reaction savdhani poorvak diya jana chahiye , kuki rachnakar apni poori chhamta se rachana krta h , rachnakar ke mnobal ko shayad aghat pahuche aise reaction se . Aise reacion se bcha jana chahiye .
    Thank u.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *