हिंदी कविता श्रृंगार | Hindi Kavita Shringar
हिंदी कविता श्रृंगार "ना बाल बनाई , मैं काजल लगाई ना लाली लगाई , ना बिंदिया लगाई फिर भी झलकती है, तुझ में चांदनी क्योंकि तुझ में है ख्वाहिशों की रोशनी " "दर्पण भी है तेरे आगे फीका क्योंकि तूने पहन रखा है आशाओं का जोगा" "यह काजल, यह…

