हिंदी कविता चाँद से फरियाद | Hindi Kavita Chand Se Fariyaad

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चाँद से एक प्यारी सी बातचीत पर हिंदी कविता चाँद से फरियाद :-

हिंदी कविता चाँद से फरियाद

हिंदी कविता चाँद से फरियाद

ऐ चाँद इतना भी न अब तू इतरा।
ऐसा तो नहीं,तुझ पर कोई नहीं उतरा।
चल जिद छोड़,और आने दे अब हमें
ताकि पहना सकें तुझे,तिरंगे का सेहरा।

क्या चाहता है हमसे,जरा हमें भी तो बता।
मान भी जा अब,इस तरह न हमें सता।
क्यों किया ऐसा,जो विक्रम लैंडर रोक दिया।
थी कोई गलती हमारी,या हुवी कोई खता।

बता किस बात का है तुझे इतना गुरुर।
हम पर भी चढ़ गया है अब तेरा सुरूर।
यह तो कोशिश थी,अभी जिद बाकी है।
अबकी चूक गए पर,फिर आएंगे जरूर।

है हौशला बाकी,जोश भी नहीं कुछ कम।
दिखाएंगे इरादों में, हमारे कितना है दम।
तुम करलो कोशिशें लाख,हम रुकेंगे न अब
तेरी जमीं पर अवश्य,फिर से रखेंगे कदम।

मान जा,चंदा मामा,तेरा अहसान मानेंगे।
गर नहीं माना तो,हम फिर से आएंगे।
ये वादा है हमारा,इस बार न चूक होगी,
तेरी जमीं पर फिर,हम तिरंगा लहरायेंगे।

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मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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