कविता पिता के लिए :- कभी धरती और आसमान है पिता

आप पढ़ रहे हैं कविता पिता के लिए :- कविता पिता के लिए कभी धरती और आसमान है पिता, मेरा अभिमान व स्वाभिमान है पिता,, बेशक जन्म दिया है मां ने पर, मेरी परवरिश का आधा ज्ञान है पिता, जो बचपन में मनमानी की थी मैने, हर उस जिज्ञासा की…

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खोटे सिक्के पर कविता :- एक दिन मैं भी चलूंगा

आप पढ़ रहे हैं खोटे सिक्के पर कविता :- खोटे सिक्के पर कविता . मै सिक्का हूं खोटा, एक दिन मै भी चलूंगा। भीख में कभी मस्जिद में, पुजारी की थाली में मिलूंगा। ख़ुश हूं किसान के हाथो में, अमीर के लॉकर में न सडूंगा। हक चुरा न ले कही…

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होलिका दहन पर कविता | Holika Dahan Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं होलिका दहन पर कविता :- होलिका दहन पर कविता हर साल मुझकों जलाने का अर्थ क्या हुआ ?सोच से अपनें मेरें जैसे सामर्थ सा हुआँहाथ में मशाल वालों से पूछतीं हैं होलिकाजलाने का प्रयास मुझकों तेरा ब्यर्थ क्यों हुआ ? अपनें शान के अग्नि में ख़ुद…

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होली की कविता :- रंगो के इस मौसम में | Holi Ki Kavita

आप पढ़ रहे हैं होली की कविता :- होली की कविता रंगो के इस मौसम में, कुछ रंग यू आकर बिखर गए। धरा में मानो चित्रकार की, चित्रकारिता प्रखर गए। कुछ लाल रंग की लालिमा में, प्रेम को अपने पा गए। कुछ हरे रंग के साथ अपनी, हरितिमा को लुभा…

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पिता के लिए हिंदी कविता | Pita Ke Liye Hindi Kavita

आप पढ़ रहे हैं पिता के लिए हिंदी कविता :- पिता के लिए हिंदी कविता पिता के लिए कोई,,,, एक दिन नहीं होता,,,, सब के सब दिन खास होते हैं, घर के सूने आँगन में , पिता की यादों में माँ की नम आंखों ने,,,,,,, सब कुछ बयांँ किया। कुछ…

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जिंदगी की हिंदी कविता | Zindagi Ki Hindi Kavita

आप पढ़ रहे हैं जिंदगी की हिंदी कविता :- जिंदगी की हिंदी कविता जिंदगी होती है, संघर्ष की कहानी। जिंदगी जीने मे, हम कर जाते है नादानी। बचपन बीता, खेलने कूदने में। जवानी बीत गई, लड़कपन में। वृद्धावस्था में याद आया, जिंदगी का मकसद। समय निकाल दिया, जिंदगी के दंद-फंद…

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हिंदी कविता अनुरोध | Hindi Kavita Anurodh

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता अनुरोध :- हिंदी कविता अनुरोध तंज.. छेद देते हैं अंतर्मन... नासूर बन जाते हैं यह जहर बुझे शब्द। घुटन... तेजाब बन जला देती है संवेदनाएं । अनबोलापन.... खा जाता है रिश्तों को। अकेलापन... भयभीत करता है। तेज आवाजें सच को छुपाने में अक्षम रहती…

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Beti Par Hindi Kavita | बेटी पर हिंदी कविता – स्वाभिमान है बिटिया |

Beti Par Hindi Kavita आप पढ़ रहे हैं बेटी पर हिंदी कविता :- Beti Par Hindi Kavitaबेटी पर हिंदी कविता विवाह की दहलीज पर बैठी।वह वैदही सी लगती है ।।कर सोलह सिंगार लाल जोड़े में ।बहुत खूबसूरत सी लगती है ।। फिरों की विधि में बैठी ।माता-पिता का स्वाभिमान लगती…

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हिंदी कविता दहलीज | Hindi Kavita Dahleez

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता दहलीज :- हिंदी कविता दहलीज माँ मन करता है तू बांहे फैलाये , और मे गले लग जाऊं, थोड़ा सा,,,,,,, रो कर मन को कर लूं हल्का , क्यों माँ अपनी दहलीज से विदा किया । जो आज मन उदास है तेरी यादों के…

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अपना गाँव कविता :- मेरी पहचान मेरा गाँव | Apna Gaon Kavita

आप पढ़ रहे हैं अपना गाँव कविता :- अपना गाँव कविता माना कि आज सबको शहर पसंद है, तो तुम गांव नहीं आते हो ... और मेरे गांव को गवार कहते हो । पता है हमें औकात शहर की .. रिश्तो के अपनेपन को तार-तार देखा है। सूने पड़े मकान,…

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होली बधाई कविता | Holi Badhai Kavita

आप पढ़ रहे हैं होली बधाई कविता :- होली बधाई कविता बस रंगों का त्योहार हैं होलीऔर ढंगों का त्योहार हैं होलीमिलजुल जाए आपस में सारेऐसा यहीं ईक़ त्योहार हैं होली करती फिज़ा ज़वान हैं होलीबदलतीं हिज़ा इंसान की होलीधरती अम्बर एक सा करतीकरती खिज़ा गुलज़ार की होली खाते सब…

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हिंदी होली गीत :- तब समझों पर्व ये होली हो | Hindi Holi Geet

आप पढ़ रहे हैं हिंदी होली गीत :- हिंदी होली गीत सब हित मीत हमजोली हो प्यार इश्क़ की बोली हो ग़र मिल जाये भूलें भटकें तब समझों पर्व ये होली हो उसे हर रंग गुलाल अबीर हो सब अल्हड़ मस्त फ़क़ीर हो हर गम से दूर , कबीर हो…

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