जिंदगी की हिंदी कविता | Zindagi Ki Hindi Kavita

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जिंदगी की हिंदी कविता

जिंदगी की हिंदी कविता

जिंदगी होती है, संघर्ष की कहानी।
जिंदगी जीने मे, हम कर जाते है नादानी।

बचपन बीता, खेलने कूदने में।
जवानी बीत गई, लड़कपन में।

वृद्धावस्था में याद आया, जिंदगी का मकसद।
समय निकाल दिया, जिंदगी के दंद-फंद में।

जिंदगी जीने का होना चाहिए, एक सलीका।

हर जीव के प्रति, मन में हो दया भाव।
परोपकार, सेवा से ही बढ़ता है, जीवन में प्रभाव।

जिंदगी को जियो, मस्त- मौला की तरह।
बार-बार नहीं मिलती जिंदगी।

अभिमान छोड़कर, स्वाभिमान से जियो जिंदगी।
मरने के बाद भी, दुनिया याद करे, ऐसे हो जिंदगी।

जैसा कबीर जी ने कहा-

जब हम पैदा हुए, दुनिया हंसी हम रोय।
करनी ऐसी कर चलो,हम हंसे दुनिया रोय।

बिना मकसद, जिंदगी हो जाती है बेकार।
जिंदगी में ताजगी रखनी है,
तो करते रहो निरंतर परोपकार।


“रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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