हिंदी कविता कई सपने | Hindi Kavita Kayi Sapne
हिंदी कविता कई सपने तन्हा बैठकरके खुद से,कई सवाल कर रखे हैं। हाँ मैंने भी दिल में,कई सपने पाल कर रखे हैं। जिंदगी की राहों पर, कई ख़याल कर रखे हैं। कुछ चंद मुट्ठीभर पैसे भी, संभाल कर रखे हैं। खून-पसीना बहाकर,दर्द-ए-गम को भुलाकर, कुछ काम जिंदगी में मैंने,बेमिसाल कर…

