हिंदी कविता मन की खुशियाँ | Hindi Kavita Man Ki Khushiyan
आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता मन की खुशियाँ :- हिंदी कविता मन की खुशियाँ मन की खुशियाँ गम लिख डाले ज्यादा नहीं तो कम लिख डाले, रजनीगंधा सी देह तुम्हारी पुष्पों सा यौवन लिख डाले। महका निखरा रूप तुम्हारा चिर-असीम आभा लिख डाले, साँसों के महके सर्पो से उन…

