दोस्ती पर कविता :- जबसे तुमसा दोस्त मिला है | Dosti Par Kavita

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बचपन के दोस्त के साथ गुजरे लम्हों पर कविता ( Dosti Par Kavita ) दोस्ती पर कविता :-

दोस्ती पर कविता

दोस्ती पर कविता

जबसे तुमसा दोस्त मिला है
हर पल खुशियों का मेला है,
स्वप्नो में भी तुम रहते संग
मन तुम बिन न रहता अकेला है।

जीवन में उसके आने से
पतझड़ भी लगता हरा भरा,
स्वर्ग से जैसे फरिश्ता कोई
मेरे ह्रदय में आकर ठहरा।

उसकी प्यारी सी बोली में
कोई जादू है मनमोहने वाला,
मेरे कोमल से हृदय में
भरा साहस और भय निकाला।

दोनों कागज की नाव बनाकर
क्रीड़ा करते तीव्र बरसात में,
शशि की चलती परछाई को
पकड़ने का प्रयत्न करते रात में।

जब भी वह मुझसे जाता रूठ
सावन भी लगता जैसे वीरान,
हरे भरे दृश्य भी ऐसे लगते
जैसे नैनो के समक्ष है रेगिस्तान।

दिल विचलित होकर कहता
मित्र नहीं कोई बिता किस्सा,
माफी मांग कर उससे कहता
वह है मेरे जीवन का हिस्सा।

पुनः मिलकर हम शोर मचाकर
खुशियों का करते है आगमन,
भगवान से करते यह कामना
व्यतीत न हो अनोखा बचपन।

मिलकर हम कोतूहल करते
पीपल की मधुर सी छाव में,
नयनों में आंसू बहने लगते
कांटा चुभता सखा के पांव में।

बचपन के मेरे घनिष्ट मित्र को
झीनकर ले गई यौवन धारा,
स्मृतियां लुप्त हुई जैसे दिन में
अदृश्य हो जाता नभ का तारा।

पढ़िए :- दोस्त पर कविता “ए दोस्त तू प्यारा है” | Dost Par Kavita


नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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