आप पढ़ रहे हैं ( Short Poem On Earth Day In Hindi ) पृथ्वी दिवस पर छोटी कविता ” वसुधा में स्वर्ग निहित है प्यारे ”

पृथ्वी दिवस पर छोटी कविता

पृथ्वी दिवस पर छोटी कविता

वसुधा में स्वर्ग निहित है प्यारे
स्वीकायें इस अमूल्य संदेश को,
मूक बिटपों को काटकर न नष्ट करो
प्रकृति के मनमोहक भेष को।

भू जननी अगर नहीं कुछ कहती है
चुपचाप वह सब कुछ सहती है,
अत्यंत व्यथित अगर इसे करोगे
प्रलय का रूप लेकर फिर बहती है।

क्षमा मांगलो माँ वसुंधरा से
इसको न समझो अपना अपमान,
ब्राह्मण नहीं जिससे जीत सका
समक्ष खड़े न हो उसके सीना तान।

अदृश्य शत्रु जब करते हैं वार
पृथ्वी पे मचता है फिर हाहाकर,
समस्त संकट क्षण में मिट सकते हैं
अगर त्रुटियों को अपनी करलो स्वीकार।

सब जन आओ यह संकल्प करें
धरा के अंगों पर न प्रहार करें,
घुल मिलकर इससे हम प्यार करें
इसे स्वर्ग बनाने का स्वप्न साकार करें।

बस बात नहीं प्रण लो हृदय से
एक-एक सब वृक्ष लगाएँगे,
स्वच्छ मृदुल वाट के आगमन से
जीवन को सहज बनाएँगे।

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नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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