देश भक्ति कविता कब तक | Desh Bhakti Kavita Kab Tak

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देश भक्ति कविता कब तक

देश भक्ति कविता कब तक

कब-तक आदमखोर दरिंदो की दरिंन्दगी बढ़ती जाएगी!
आखिर कब-तक दहशतगर्दों की दहशतगर्दी बढ़ती जाएगी!!

फिर क्या यूँ ही आतंकी सरेआम-कत्लेआम करते जायेंगे!
फिर कब-तक उरी,पुलवामा,मुंबई जैसे हमले होते जायेगे!!

फिर कितने माँ का आँचल सूना, फिर कितने मासूमों की दुनिया लुटेगी!
आखिर कब-तक आतंकी हमलो में, सुहागिनों की माँग उजड़ेगी!!

फिर कितने नववधुओं की आँखो से आंसू छलकेंगे!
फिर कितने बाप अपने बेटों की अर्थी लेकर निकलेंगे!!

फिर कितने बेटों को अब खोना होगा!
फिर कितनी आँखो को रोना होगा!!

अब वक्त आ गया है, उन अधर्मियों को सबक सिखाने का!
अत्याचारी,पापी,हत्यारों को मरघट में सुलाने का!!

सुन लो कायर अरे नामर्दों, सरहद पर हमला करने वालो!
सुन लो छुप-छुपकर इंसानियत का गला घोटने वालो!

अरे आदमखोर दरिंदो सुन लो रे हैवानो!
अरे अधर्मी दुष्टों अरे पापी -पाकिस्तानो!!

अब बहुत हो गयी बुजदिलों तुम्हारी कायरता भरी अत्याचारी!
बहुत हो गया कत्लेआम अब नहीं है खैर तुम्हारी!!

उठो जवानों झपट पड़ो दहशतगर्दों पर बब्बर शेर बनकर!
टूट पड़ो दुश्मनों पर अब तुम माँ के वीर सपूत बनकर!!

अब निकालो तलवार म्यान तुम उठो उन्हें ललकारो!
तुम अग्नि बनकर दहको सिंह बन हुंकारो!!


बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने गाँव-दोन्देकला, रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

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