बिसेन कुमार यादव

नाक पर कविता :- नाकों की दुनिया | Perfect Nose Poem In Hindi

Nose Poem In Hindi आप पढ़ रहे हैं नाक पर कविता :-

Nose Poem In Hindi
नाक पर कविता

नाक पर कविता

किसी की नाक पतली तो किसी की मोटी!
नाकों की दुनिया भी अजीब अनूठी!!

चोंच की तरह नुकीली तो किसी की चपटी नाक!
किसी की बड़ी तो किसी की छोटी नाक!!

किसी की होती है मोटी, चौड़ी नाक!
तो किसी की होती है,लम्बी टेड़ी नाक!!

हमारे चेहरे का नक्शा बिगाड़ती है नाक!
हमारे चेहरे की नक्शा बनाती है नाक!!

ये शरीर का एक विशेष हिस्सा है!
नाक का भी अजीब किस्सा है!!

अगर नाक नहीं होती तो क्या होता?
चेहरा कैरमबोर्ड की तरह एक दम सपाट होता!!

भौहें और मुँह को सिकोड़ नहीं पाते!
पकवानों की महक हम जान नहीं पाते!!

मुँह से खर्राटे लेते, मुँह से ही छींकते!
मुँह से साँस छोड़ते, और मुँह से ही साँस लेते!!

नाक नहीं होती तो हम छींक से परेशान न होते!
नाक बंद, नाक बहना जैसे एलर्जीयों से दूर होते!!

बताओ ऐनक ,चश्मा कहाँ लटकते!
अगर नाक न होते तो कहाँ पहनते!!

अगर हमारी नाक ही नहीं होती!
तो शूर्पनखा की नाक न कटी होती!

अगर नाक नहीं होती तो रावण मरा न होता!
फिर राम और रावण के बीच युद्ध कहाँ होता!!

रिश्तेदारों के सामने न नाक कटने का डर रहता!
न उनके समक्ष हमें कोई कुछ कहता!!

नाक के बिना चेहरे की बनावट न आकार पूरा होता!
अगर नाक नहीं होता तो महिलाओ की श्रृंगार अधूरा होता!!

अगर नाक नहीं होती,तो मुहावरे और ये कविता नहीं बनती!
नाक के लिए श्रृंगार भँवर, काँटा, नथली नहीं होती!!

और एक- एक नाक हमारी!
फैला रही है, भारी बिमारी!!

ये नाक नहीं होता तो ये चीनी बिमारी नहीं होती।
ना की दुनिया में इतनी विनाशकारी नहीं होती।।

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बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने गाँव-दोन्देकला, रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

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