कन्या भ्रूण हत्या पर कविता | Kanya Bhrun Hatya Par Sad Kavita

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कन्या भ्रूण हत्या पर कविता

कन्या भ्रूण हत्या पर कविता

माँ मुझे भी जीने की लालसा है!
मेरी भी कुछ अभिलाषा है!

मैं भी नभ के तारे बन चाहती हूँ दमकना!
मैं भी सूरज बन नभ में चाहती हूँ चमकना!

मुक्तगगन में पंख लगाकर उड़ना चाहती हूँ!
माँ मैं भी इस जग में जन्म लेना चाहती हूँ!

मैं तुम्हारी प्यारी बेटी आँगन की किलकारी हूँ!
मैं तुम्हारी न्यारी बेटी घर की राजदुलारी हूँ!

फिर पेड़ के तने को काटकर तुम फल कहाँ से पाओगे!
अपनी ही अंश को मिटाकर, तुम वंश कैसे बढ़ाओगे!!

अगर बेटी जन्म नहीं लेगी तो तुम माँ कहाँ से लाओगे!
फिर तुम ही सोचो मुझे मारकर तुम घर कैसे चलाओगे!

ये बात तुम सुन लो माँ मेरी अब बदला जमाना है,
अब तो दुनिया भी कह रही है बेटी बचाना है!

फिर मुझे न मारो कोख में मुझे न मरना है,
मेरी पुकार तुम सुन लो माँ मुझे भी जीना है।

पढ़िए :- ” मैं मजदूर की बेटी हूँ ” ट्विंकल वर्मा द्वारा रचित कविता


बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने गाँव-दोन्देकला, रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

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