भ्रूण हत्या पर कविता :- माँ मुझे भी जीना है | Bhrun Hatya Kavita In Hindi

7+

भ्रूण हत्या पर कविता

भ्रूण हत्या पर कविता

माँ मुझे भी जीने की लालसा है!
मेरी भी कुछ अभिलाषा है!

मैं भी नभ के तारे बन चाहती हूँ दमकना!
मैं भी सूरज बन नभ में चाहती हूँ चमकना!

मुक्तगगन में पंख लगाकर उड़ना चाहती हूँ!
माँ मैं भी इस जग में जन्म लेना चाहती हूँ!

मैं तुम्हारी प्यारी बेटी आँगन की किलकारी हूँ!
मैं तुम्हारी न्यारी बेटी घर की राजदुलारी हूँ!

फिर पेड़ के तने को काटकर तुम फल कहाँ से पाओगे!
अपनी ही अंश को मिटाकर, तुम वंश कैसे बढ़ाओगे!!

अगर बेटी जन्म नहीं लेगी तो तुम माँ कहाँ से लाओगे!
फिर तुम ही सोचो मुझे मारकर तुम घर कैसे चलाओगे!

ये बात तुम सुन लो माँ मेरी अब बदला जमाना है,
अब तो दुनिया भी कह रही है बेटी बचाना है!

फिर मुझे न मारो कोख में मुझे न मरना है,
मेरी पुकार तुम सुन लो माँ मुझे भी जीना है।

पढ़िए :- ” मैं मजदूर की बेटी हूँ ” ट्विंकल वर्मा द्वारा रचित कविता


बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने गाँव-दोन्देकला, रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

“ भ्रूण हत्या पर कविता ” ( Bhrun Hatya Kavita In Hindi ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

7+

Leave a Reply