जिंदगी पर हिंदी कविता :- पतंग समान है | Zindagi Par Kavita

जिंदगी पर हिंदी कविता

जिंदगी पर हिंदी कविता

जिंदगी पतंग समान है ,
यह जिंदगी पतंग समान है ।।

कभी यह ऊपर उठती है ,
कभी यह नीचे गिरती है ।
बहुत हिचकोले खाती है ,
कभी यह चक्कर खाती है।
जग को समझो जैसे ,
खुल्ला आसमान है ।।
जिंदगी पतंग समान है ,
यह जिंदगी पतंग समान है ।।

भाग्य की डोर है इसमें ,
कर्म का छोर है इसमें ।
बुद्धि का जोर है इसमें ,
कष्ट चहुँओर है इसमें ।
डोर पकड़ने वाला ,
वह भगवान है ।।
जिंदगी पतंग समान है ,
यह जिंदगी पतंग समान है ।।

जतन से इसे सम्भालो जी ,
गिरने से इसे बचा लो जी ।
खुशी के गीत गा लो ,
इसे ऊपर उठा लो जी ।
जीवन का हर क्षण समझो ,
एक इम्तिहान है ।।
जिंदगी पतंग समान है ,
यह जिंदगी पतंग समान है ।।

कोई उपकार करता है ,
कोई प्रतिकार करता है ।
जिसकी जैसी है बुद्धि ,
वही व्यवहार करता है ।
जो अपना समझे सबको ,
वही इंसान है ।।
जिंदगी पतंग समान है ,
यह जिंदगी पतंग समान है ।।

नहीं यह हाथ से छूटे ,
न इसकी डोर ही टूटे ।
करो कोशिश जीवन में ,
कोई हमसे नहीं रूठे ।
सुख – दुख तो “जग्गा” ,
कर्मों का ही विधान है ।।
जिंदगी पतंग समान है ,
यह जिंदगी पतंग समान है ।।

पढ़िए :- जिंदगी का सफर कविता “ऐ जिन्दगी मत पूछ”


रचनाकार का परिचय

जगवीर सिंह चौधरीयह कविता हमें भेजी है जगवीर सिंह चौधरी जी ने लोहकरेरा, रुनकता, आगरा से।

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