गंगा जी पर कविता :- गंगा नदी ही नहीं है | Ganga Ji Par Kavita

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गंगा जी पर कविता

गंगा जी पर कविता

गंगा नदी ही नहीं है,
हमारी संस्कृति का प्रतीक है।।

गंगा के प्रवाह में
विहित ऊर्जा की वह
दिव्य शक्ति है।।

गंगा की वेदना …
कही नहीं जाती हैं,
वह दिन पे दिन प्रदूषित
होती जाती हैं।।

वह गंगा भगवती है
अनादि काल से
वसुंधरा पर बहती उनकी
धारा है।।

विष्णु के चरण कमलों से निकली
शिव के मस्तक पर शोभा पाती है।।

भागीरथ के कठोर तप से
प्रसन्न हो धरती पर अपनी
धरा बहाती है।।

अत्यन्त तीव्र वेग को
धरती सह नहीं पाती है
तब शिव की जटा में समाती है।।

अपनी कुछ धारा को
वसुंधरा पर पहुंचाती हैं
तब गंगा के पवन जल से
धरती जगमगाती है।।

राजा सगर के,
साठ हजार पुत्रों का
मोक्ष कर जाती है,
गंगा के पवित्र जल से
धरती शुद्ध हो जाती है।।

हिमालय से लेकर
बंगाल की खाड़ी के ,
सुंदर वन तक अपना
स्वरूप फैलाती हैं,
जन – जन के दिलो में
आस्था उठ आती हैं।।

जिनकी स्मृति लाखो
पापो का नाश कर देती हैं
जिनके नाम उच्चारण से
सम्पूर्ण जगत को पवित्र
कर देती हैं।।

आज वह अपनी व्यथा बताती है
नहर , आवास , सड़क निर्माण
उद्योगों से निकलने वाला कचरा
पतित पावन गंगा के जल को
दूषित करता जाता हैं।।

गंगा जी के साथ किया
अमानवीय व्यहवार,
पावन जल पर अथाह
शव प्रवाह मां गंगा को
ठेस पहुंचाता है,
जब मां का शीतल जल
पीने योग्य नहीं रह जाता हैं।।

जो प्रथ्वी का सौभाग्य रूप है
जो अनायास ही सम्पूर्ण विश्व को
उत्पन्न करने वाले शिव का भी
परम ऐश्वर्य है ,
जिसके अमृत जल से सारे
अमंगल दोष दूर हो जाते है।।

जब इनका सम्मान किया
नहीं जाता हैं,
तब वह अपना विशाल रूप
समेटते जाती है
धीरे धीरे अपना जल
कम करते जाती हैं।।

भारत देश धन्य है
जहा तीनों लोको को
पवित्र करने वाली मां
गंगा बहती है,
और धन्य है हमारा जीवन
जिनके पावन दर्शन हमे होते हैं।

पढ़िए :- गंगा नदी पर कविता | Ganga Nadi Par Kavita


रचनाकार का परिचय

संध्या शर्मानाम – संध्या शर्मा

स्नाकोत्तर – एम. एससी . ( वनस्पति विज्ञान ) 71%
“विश्वविद्यालय की प्रावण्य सूची में स्थान ”
(देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर )

साहित्यिक परिचय – 1 साल से लिखना प्रारम्भ किया है जिसमे 50 से ज्यादा कविताएं तथा 5
लेख है जो अलग – अलग वेबसाइट रचनाएं प्रकाशित है।

जिसमे कुछ को सम्मान मिला है , कुछ को सराहना , कुछ को मासिक पत्रिका में स्थान।।

लेखन मेरा शोक है जिसमें मुझे लिखने पर अंदर से खुशी मिलती हैं। शब्द गहरे नहीं होते है मेरी रचनाओं के सीखने का प्रयास कर रही हूं। मंच पटल पर बहोत कुछ सीखने को मिलता है। वर्तमान में सिविल सर्विस , प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के साथ लेखन कार्य कर रही हूं।

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