बेटी पर कविता – मन की मार | Beti Par Kavita
प्रस्तुत है रामबृक्ष कुमार जी द्वारा रचित " बेटी पर कविता - मन की मार " :- बेटी पर कविता - मन की मार बन अभिशाप जगत में बेटीमैं छिप कर क्यों जीवन जीतीकिसे सुनाऊं कौन सुनेगा किससे दिल की बात कहूं मैं?कब तक मन की मार सहूं मैं? मुझसे…

